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गुजरात के जामनगर स्थित वंतारा में हाथियों के स्थानांतरण के मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार

गुजरात के जामनगर स्थित वंतारा में मंदिर की हथिनी महादेवी के स्थानांतरण के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 14 अगस्त को सुनवाई करेगा. याचिकाकर्ता ने वंतारा पर सुप्रीम कोर्ट आदेशों के उल्लंघन और जंगली जानवरों को अवैध रूप से रखने का आरोप लगाया है.

Supreme Court

गुजरात के जामनगर स्थित वंतारा में हाथियों के स्थानांतरण के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट जल्द सुनवाई को तैयार हो गया है. कोर्ट 14 अगस्त को याचिका पर सुनवाई करेगा. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने सीजेआई बीआर गवई के समक्ष जल्द सुनवाई की मांग को लेकर मेंशनिंग करते हुए कहा कि वंतारा नामक एक अभयारण्य है, जहां हथिनी को ले गए हैं. वे एक मंदिर की हथिनी को जबरन ले गए हैं.

याचिककर्ताओ ने क्या कहा?

याचिककर्ताओ का कहना है कि हथिनी को जबरन ले जाया गया और वह मंदिर की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है. जुलाई में मुंबई हाई कोर्ट ने इसको लेकर जैन समुदाय की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया था. दायर जनहित याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले की महादेवी हथिनी को गुजरात के जामनगर स्थानांतरित किए जाने का विरोध हो रहा है. इसको लेकर हजारों लोग सड़कों पर है.

देवेंद्र फडणवीस ने हथिनी को वापस लाने के लिए कहा

जिसके बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि राज्य सरकार हथिनी को वापस लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करेगी. दायर जनहित याचिका में यह भी कहा गया है कि वंतारा ने पहले के सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन किया है और अवैध तरीके से हाथियों व अन्य जंगली जानवरों को अपने पास रखा है. हालही में महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले की महादेवी हथिनी को गुजरात के जामनगर स्थानांतरित किए जाने के फैसले का लगातार विरोध हो रहा है. यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील जया सुकीन की ओर से दायर की गई है.

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दायर याचिका में एक समिति के गठन की मांग की गई

दायर याचिका में एक समिति के गठन की मांग की गई है. साथ ही जब्त किए गए सभी हाथियों को उनके मालिक को वापस करने के आदेश देने की अनुमति की मांग की गई है. इसके अलावे सभी जंगली जानवरों और पक्षियों को मुक्त कर जंगल में छोड़ने की मांग की गई है. दायर याचिका में यह भी कहा गया है कि त्रिपुरा हाई कोर्ट द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति असंवैधानिक है और वाइल्डलाइफ संरक्षण अधिनियम 1972 सहित अन्य कानूनों का उल्लंघन किया गया है.

मंदिरों से हाथियों को जबरन ले जाया गया-याचिकाकर्ता

याचिकाकर्ता ने कहा है कि मंदिरों से हाथियों को जबरन ले जाया गया और मालिकों की सहमति के बिना वंतारा में रखा गया है. दक्षिण अफ्रीका से भारत लाए गए चीतों, बब्बरों, शेरों और तेंदुओं जैसे जंगली जानवरों को बड़ी संख्या में भारत लाया गया और वंतारा में रखा गया है. दायर याचिका में 2014 में सुप्रीम कोर्ट में WRRC नामक एनजीओ द्वारा दायर याचिका का हवाला दिया गया. जिस याचिका पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाथियों को मंदिरों में इस्तेमाल करने को लेकर आदेश दिया था.

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-भारत एक्सप्रेस 



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