जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक मामले में सुप्रीम कोर्ट 7 जनवरी 2026 को सुनवाई करेगा. उनकी पत्नी गीतांजलि जे आंगमो ने वांगचुक की हिरासत को अवैध करार देते हुए याचिका दायर की है. पिछली सुनवाई में सोनम वांगचुक ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने की मांग की थी, जिसका केंद्र सरकार ने विरोध किया था.
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि सभी कैदियों के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए. पिछली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि सोनम वांगचुक की नजरबंदी सार्वजनिक व्यवस्था या सुरक्षा की वास्तविक चिंताओं पर आधारित नहीं है बल्कि असहमति के अपने अधिकार का प्रयोग कर रहे एक सम्मानित नागरिक को चुप कराने की एक सोची-समझी कोशिश है. अपनी नजरबंदी को चुनौती देने के लिए आधार जोड़ने की मांग वाली एक याचिका में गिरफ्तारी से पहले वांगचुक के खिलाफ की गई कार्रवाई का हवाला दिया था. जिसमें उनके एनजीओ के लिए विदेशी फंडिंग प्रमाणपत्र रद्द करना शामिल है.
एयरपोर्ट से जेल तक पुलिस की निगरानी का दावा
इससे पहले वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि राजस्थान पुलिस और खुफिया विभाग उनके हर कदम पर नजर रख रहे हैं. उन्होंने हलफनामे में कहा है कि सितंबर के अंत में उन्हें लगातार दिल्ली में निगरानी में रखा जा रहा है. उन्होंने कहा है कि 7 अक्टूबर और 11 अक्टूबर को जब वह जोधपुर जेल अपने पति से मिलने गई तो जोधपुर एयरपोर्ट पर उतरते ही उन्हें पुलिस की गाड़ी में बैठा लिया गया और पूरी यात्रा के दौरान पुलिस उनके साथ रही.
उन्होंने दावा किया है कि जोधपुर जेल में बंद पति से मुलाकात के दौरान एक डीसीपी और महिला कांस्टेबल हर वक्त साथ रहे. उनके कानूनी नोटिस का फोटो भी खिंची. उन्होंने हलफनामे में कहा है कि पुलिस और खुफिया विभाग द्वारा की जा रही यह निगरानी अनुच्छेद 19 और 21 के तहत नागरिक अधिकारों का उल्लंघन है. 26 सितंबर को उन्हें एनएसए के तहत गिरफ्तार किया गया था. जिसके बाद उनको राजस्थान के जोधपुर जेल भेज दिया गया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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