आवारा कुत्तों के मामले में दायर विभिन्न याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 13 जनवरी को सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि अदालत को इस मामले में दखल देना चाहिए. उन्होंने कहा कि एमिकस क्यूरी अच्छे होते है, लेकिन कानून के सलाहकार होते हैं. वे किसी विषय के विशेषज्ञ नही होते हैं. सिंघवी ने अरावली का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले कोर्ट द्वारा गठित समिति में अधिकतर अधिकारी थे, विशेषज्ञ नही थे. इसलिए आदेश को दोबारा वापस लेना पड़ा.
वही मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील महालक्ष्मी पावनी ने कहा कि लोग कुत्ते रखने वाली महिलाओं के लिए अपमानजनक बातें करते हैं. कह रहे हैं कि महिलाएं संतुष्टि के लिए कुत्तों के साथ सोती हैं. वही सुनवाई के दौरान एक अन्य वकील ने कोर्ट को बताया कि सभी कुत्ते आक्रामक नही होते हैं. एम्स में गोल्डी नाम की एक फीमेल डॉग कई सालों से है. इसपर कोर्ट ने कहा कि सड़क पर रहने वाले कुत्तों में कीड़े होते है. अगर ऐसे कुत्ते अस्पताल में होंगे तो यह बहुत खतरनाक हो सकता है. अस्पतालों में कुत्तों को अच्छा दिखाने या महान साबित करने की कोशिश न करें.
जज और वकीलों के बीच कुत्तों के व्यवहार पर बहस
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन वी अंजारिया की पीठ सुनवाई कर रही हैं. पिछली सुनवाई में जस्टिस विक्रमनाथ ने कहा था कि कुत्ते इंसानों का डर पहचान लेते हैं, इसलिए काटते है. जिसका समर्थन करने वाले वकील ने इनकार किया था. इसपर जस्टिस विक्रमनाथ ने कहा था कि यह बातें वह अपने निजी अनुभव से कह रहे है. सुनवाई के दौरान अन्य वकील ने कोर्ट को बताया था कि कुत्तों को जहां से पकड़ा गया है, वही छोड़ा जाना चाहिए. उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया था कि बेंगलुरू में कुत्तों की माइक्रो चीपिंग शुरू हो गई है और यह महंगा भी नही है.
सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया था पालतू कुत्ते का मालिक होता है, जबकि सड़को पर रहने वाले कुत्तों का मालिक नही होता और ना ही राज्य सरकार की जिम्मेदारी है. लेकिन राज्य की जिम्मेदारी वैक्सिनेशन देना है. अभी तक सिर्फ 66 AB सेंटर को ही मान्यता मिली है. पूरे देश में 5.2करोड़ कुत्ते है.
-भारत एक्सप्रेस
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