सुप्रीम कोर्ट ने रिलायंस कम्युनिकेशंस (Reliance Communications), उसके ग्रुप की कंपनियों और उनके प्रवर्तक अनिल अंबानी से जुड़े कथित बड़े बैंकिंग और कॉरपोरेट धोखाधड़ी की जांच की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा हैं. सीजेआई बी आर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने केंद्र सरकार, सीबीआई, ईडी सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.
सीबीआई और ईडी दे स्टेट्स रिपोर्ट
यह याचिका पूर्व केंद्रीय सचिव ईएएस सरमा ने दायर की हैं. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने तर्क दिया कि यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा कॉर्पोरेट घोटाला हो सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि यह भारत के इतिहास में संभवतः सबसे बड़े कॉरपोरेट फ्रॉड से संबंधित है. यह फ्रॉड 2007-2008 से चल रहा है. कोर्ट ने पूछा कि आपने प्रतिवादियों को याचिका की एक प्रति नहीं दी? भूषण ने कहा कि हमें सीबीआई और ईडी से स्टेट्स रिपोर्ट चाहिए.
अदालत की निगरानी में जांच की मांग
दायर याचिका में अनिल अंबानी के समूह रिलायंस एडीए समूह (Reliance ADA Group) की कई कंपनियों ने सार्वजनिक धन का व्यवस्थित रूप से दुरुपयोग किया. बड़े पैमाने पर धन के हेराफेरी, जालसाजी, खातों में हेराफेरी, फर्जी कंपनियों के इस्तेमाल और समन्वित वित्तीय कदाचार का आरोप लगाया गया है. इस पूरे मामले की अदालत की निगरानी में जांच कराने की मांग की गई है.
रिपोर्ट के बावजूद नहीं हो रही जांच
दायर याचिका में यह भी कहा गया है कि सीबीआई की ओर से 21 अगस्त 2025 को दर्ज की गई एफआईआर और ईडी की कार्यवाही कथित धोखाधड़ी का केवल एक छोटा हिस्सा उजागर करता हैं. याचिका में कहा गया है कि विस्तृत फॉरेंसिक ऑडिट और व्यापक धोखाधड़ी की ओर इशारा करने वाली स्वतंत्र रिपोर्ट के बावजूद, एजेंसियाँ बैंक अधिकारियों और नियामकों की भूमिका की जांच नहीं कर रही हैं.
याचिका में यह भी कहा गया है कि व्यवस्थित धोखाधड़ी और धन के दुरुपयोग के निष्कर्षों की बॉम्बे हाईकोर्ट के एक फैसले द्वारा न्यायिक पुष्टि की गई है.
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-भारत एक्सप्रेस
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