सुप्रीम कोर्ट में लंबित मुकदमों की संख्या को कम करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए ऐतिहासिक कदम के तहत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कैबिनेट के उस फैसले को मंजूरी दे दी है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या को 34 से बढ़ाकर 38 किया गया है. केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस फैसले की जानकारी साझा की. उन्होंने बताया कि इस अध्यादेश के जरिए सुप्रीम कोर्ट अधिनियम 1956 में संशोधन किया गया है.
लंबित मामलों के निपटारे में आएगी तेजी
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 5 मई को संसद में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन 2026 पेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. इसका उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम 1956 में संशोधन करके भारत के सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करना है.
इससे पहले साल 2019 में इसे बढ़ाकर 31 से 33 किया गया था. सरकार का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ने से लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी और न्याय वितरण प्रणाली अधिक कुशल बन सकेगी. वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में 88447 मामले लंबित हैं, जिनके शीघ्र निस्तारण के लिए न्यायाधीशों की संख्या को आवश्यक माना जा रहा है.
सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या का इतिहास
बता दें कि वर्ष 1950 में जब सुप्रीम कोर्ट की स्थापना हुई थी, तब इसमें मुख्य न्यायाधीश सहित कुल 8 न्यायाधीश थे. इसके बाद 1956 में 11, 1960 में 14, 1977 में 18, 1986 में 26, 2009 में 31, 2019 में 34 और अब 2026 में इसे बढ़ाकर 38 करने का प्रस्ताव न्यायपालिका के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
ये भी पढ़ें: NEET UG 2026 पेपर लीक: बायोलॉजी का पेपर लीक करने वाली मनीषा माथरे 14 दिन की CBI रिमांड पर
चीन के सुप्रीम कोर्ट में हैं सबसे ज्यादा जज
ज्ञात हो कि दुनिया का एक ऐसा देश है, जहां पर सबसे ज्यादा जज हैं, यह देश चीन है. एक रिपोर्ट के मुताबिक इसमें लगभग 400 जज हैं, इतना ही नहीं यहां पर 600 से अधिक प्रशासनिक कर्मी हैं. यह बीजिंग में स्थित है. इसकी स्थापना 1949 में की गई थी और इसके काम-काज के नियम 1954 में पहली बार तय किए गए थे.
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.



