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सड़क हादसों में उजड़ रही युवाओं की दुनिया, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ‘लेन ड्राइविंग’ का अभाव और लापरवाही पड़ रही भारी

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में बढ़ते सड़क हादसों और मौतों पर गंभीर चिंता जताते हुए केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यात्री सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाने का निर्देश दिया है.

Supreme Court

देश भर में सड़क हादसों में होने वाली मौतों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, देश के सभी राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेशों को यात्री सुरक्षा को बढ़ावा देने का निर्देश दिया है. जस्टिस जे. बी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि किसी भी सार्वजनिक सेवा वाहन को फिटनेस सर्टिफिकेट या परमिट तब तक नहीं दिया जाना चाहिए, जब तक कि उसमें वाहन लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस और इमरजेंसी पैनिक बटन स्थापित, सत्यापित और वाहन डेटाबेस में दर्ज न हो जाए.

कोर्ट ने आदेश दिया है कि नए और मौजूदा दोनों सार्वजनिक वाहनों में वाहन लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस और पैनिक बटन की स्थापना को समयबद्ध और सत्यापन योग्य तरीके से सुनिश्चित करते हुए नियम 125 H को सख्ती से लागू करें. केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 के नियम 125 H के तहत कानूनी अनिवार्यता के बावजूद वर्तमान में 1 फीसदी से भी कम परिवहन वाहनों में अनिवार्य वाहन ट्रैकिंग उपकरण लगे होने पर चिंता व्यक्त करते हुए कोर्ट ने यह निर्देश जारी किया है.

कोर्ट ने जताई चिंता

कोर्ट ने कहा कि आपातकालीन स्थिति में समय पर प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाकर ये उपकरण यात्रियों, विशेषरूप से महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं. जस्टिस पारदीवाला ने भारतीय सड़कों पर लेन अनुशासन की भारी कमी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि देश में लेन ड्राइविंग की कोई अवधारणा नहीं है. अधिकांश दुर्घटनाएं इसी कारण होती है. केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का मानना है कि जब तक समाज का सहयोग नही मिलेगा, मानवीय व्यवहार नहीं बदलेगा और कानून का डर नही होगा.

गडकरी के मुताबिक देश में हर साल औसतन 4.80 से 5 लाख सड़क हादसे होती है न, जिसमें लगभग 1.80 लाख लोगों की मौत हो जाती है. उनके मुताबिक इन दुर्घटनाओं से जीडीपी को 3 फीसदी का नुकसान होता है, जो किसी बीमारी या युद्ध से भी अधिक है. सभी दुर्घटनाओं में 66.4 फीसदी मौतें 18 से 45 साल के युवाओं की होती है. जो देश के भविष्य के लिए चिंता का विषय है.

वर्ल्ड बैंक के रिकॉर्ड के मुताबिक भारत में दुनिया का सिर्फ एक फीसदी ही वाहन है इसके बावजूद देश में 11 फीसदी हादसे होते है. यह भारत ही नही विश्व भर में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की संख्या बहुत ज्यादा है.

बता दें कि भारत में सड़कों और हाइवे की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है. इसकी रफ्तार कम होने का नाम नही ले रहा है.

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-भारत एक्सप्रेस



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