सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हिंसा में पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेंद्र सिंह की जातीय हिंसा में भूमिका का आरोप लगाने वाली ऑडियो क्लिप के मामले में टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने कहा कि ऑडियो क्लिप पर फॉरेंसिक जांच गलत दिशा में जा रही है. कोर्ट ने कहा कि हमने वीडियो की प्रामाणिकता के बारे में नहीं पूछा था, बल्कि आवाज के नमूनों की जांच का निर्देश दिया था. जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने कहा कि हम यह जानना चाहते हैं कि उस आवाज को व्यक्ति की स्वीकृति आवाज के साथ जांचने के बाद क्या यह पहचाना जा सकता है कि दोनों में एक ही व्यक्ति बोल रहा है.
पूर्व सीएम की बेटी की याचिका खारिज
वही कोर्ट ने बीरेन सिंह की बेटी द्वारा मामले में पक्षकार बनाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह कोई पारिवारिक सहायता कार्यक्रम नहीं है. कोर्ट 25 अगस्त को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े किसी भी गलत कार्य में शामिल लोगों की रक्षा करने की कोई आवश्यकता नही है. यह याचिका कुकी ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ट्रस्ट की ओर दायर की गई है. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने जातीय हिंसा को बढ़ावा देने में मणिपुर के पूर्व सीएम बीरेंद्र सिंह की भूमिका को लेकर लीक ऑडियो टेप पर फोरेंसिक रिपोर्ट देने को कहा था.
ऑडियो क्लिप पूर्व सीएम की आवाज से मेल खाती
टूथ लैब्स की स्थापना साल 2007 में हुई थी. ये भारत की पहली नॉन गवर्मेन्ट फूल फ्लेज्ड फोरेंसिक लैब है. जिसने पुष्टि की है कि 93 % ऑडियो टेप मुख्यमंत्री के आवाज से मेल खाते है. दायर याचिका में सीएम पर मणिपुर में हिंसा भड़काने का आरोप है. कथित तौर पर ऑडियो में मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री बीरेन सिंह के बयानों को रिकॉर्ड किया गया था, जिसमें राज्य की जातीय हिंसा में उनकी संलिप्तता का संकेत दिया गया था. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी थी कि जो टेप सामने आए है, वे बहुत गंभीर है. इस पर सीजेआई ने कहा था कि सुनिश्चित कीजिए कि ये एक और मुद्दा न बने.
टेप में बीरेन सिंह की गंभीर स्वीकारोक्ति- प्रशांत भूषण
पिछली सुनवाई में वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि मणिपुर के मुख्यमंत्री का एक ऑडियो टेप सामने आया है, जिसमें उन्हों दावा करते हुए सुना जा सकता है कि उन्होंने ही राज्य में हिंसा भड़काई, हथियारों को लूटने दी और हिंसा में शामिल लोगों को संरक्षण दिया. सुप्रीम कोर्ट इस टेप की प्रामाणिकता की जांच करने के लिए सहमत हो गया था. वही सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रशांत भूषण के इस दावों पर आपत्ति जताते हुए कहा था ‘न्यायाधीश हाथी दांत के महलों में रह रहे हैं’. जिसपर सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने सॉलिसिटर जनरल से कहा था ‘बिल्कुल नहीं, हम चीजों को दबाने के किसी भी प्रयास की सराहना नहीं करते. हम मणिपुर की स्थिति से अच्छी तरह वाकिफ हैं’.
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भारत एक्सप्रेस
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