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सुप्रीम कोर्ट का क्रांतिकारी फैसला! अब किसी भी उम्र के बच्चे को गोद लेने पर मिलेगी ‘मैटरनिटी लीव’, सरकार से कहा- ‘पैटरनिटी लीव’ पर भी करें विचार!

सुप्रीम कोर्ट ने 3 महीने की उम्र सीमा हटाते हुए गोद लेने वाली माताओं को 12 हफ्ते की मैटरनिटी लीव का अधिकार दिया. कोर्ट ने केंद्र सरकार से पितृत्व अवकाश (Paternity Leave) नीति पर भी विचार करने को कहा है…

Edited by Rohit Agrawal

Supreme Court maternity leave adoption rule: देश की सर्वोच्च अदालत ने मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 की उन बेड़ियों को तोड़ दिया है जो गोद लेने वाली माताओं के बीच भेदभाव करती थीं. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा है कि अब 3 महीने से अधिक उम्र के बच्चे को गोद लेने वाली माँ भी 12 सप्ताह के मातृत्व अवकाश(Maternity leave) की हकदार होगी. कोर्ट ने उस पुराने नियम को असंवैधानिक माना जिसमें केवल 3 महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लेने पर ही छुट्टी का प्रावधान था. इसके साथ ही अदालत ने केंद्र सरकार को एक और बड़ा सुझाव देते हुए ‘पितृत्व अवकाश’ (Paternity Leave) की नीति पर भी गंभीरता से विचार करने को कहा है.

3 महीने की सीमा का क्या तुक?

हंसानंदिनी नाम की महिला द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार के तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया. केंद्र सरकार ने दलील दी थी कि जैविक माँ और गोद लेने वाली माँ में अंतर होता है, लेकिन जस्टिस पारदीवाला ने तीखा सवाल किया कि आखिर 3 महीने से कम उम्र के बच्चे की शर्त के पीछे क्या तर्क है?

याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को समझाया कि व्यावहारिक रूप से किसी अनाथ या परित्यक्त बच्चे को 3 महीने से कम की उम्र में गोद लेना लगभग असंभव है. ऐसे में यह कानून माताओं को उनके हक से वंचित कर रहा था. कोर्ट ने अब इस उम्र सीमा को हटाकर इसे 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए प्रभावी बनाने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है.

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 कोर्ट ने क्यों लिया ये फैसला?(Maternity leave)

अदालत ने माना कि मातृत्व अवकाश का उद्देश्य केवल शारीरिक स्वास्थ्य नहीं, बल्कि बच्चे और माँ के बीच एक भावनात्मक रिश्ता (Bonding) विकसित करना भी है. चाहे बच्चा जैविक हो या गोद लिया हुआ, उसे माँ की देखभाल की जरूरत होती है. याचिका में चुनौती दी गई थी कि मातृत्व लाभ अधिनियम की धारा 5(4) भेदभावपूर्ण है. सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सहमति जताते हुए कहा कि बच्चे की उम्र चाहे जो हो, उसे नए परिवार में ढलने के लिए माँ के समय और साथ की आवश्यकता होती है.

पितृत्व अवकाश पर सरकार को निर्देश

इस फैसले का सबसे चौंकाने वाला और सकारात्मक पहलू यह रहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अब पिता की भूमिका को भी रेखांकित किया है. जस्टिस पारदीवाला की पीठ ने केंद्र सरकार से कहा कि वे ‘पितृत्व अवकाश'(Paternity Leave) को लेकर अपनी राय स्पष्ट करें और इस पर विचार करें. कोर्ट का मानना है कि बच्चे के पालन-पोषण की जिम्मेदारी केवल माँ की नहीं, बल्कि पिता की भी समान रूप से है. यदि सरकार इस पर सकारात्मक कदम उठाती है, तो आने वाले समय में निजी और सरकारी क्षेत्रों में पिताओं को भी अपने नवजात या दत्तक बच्चों के लिए छुट्टियां मिल सकेंगी.

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-भारत एक्सप्रेस



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