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महिला वकीलों को मिले 30% आरक्षण: लाडली फाउंडेशन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र और राज्यों को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी विधि अधिकारी पदों और कानूनी पैनलों में महिला अधिवक्ताओं के लिए न्यूनतम 30 फीसदी आरक्षण की मांग वाली जनहित याचिका पर केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब मांगा है.

लाडली फाउंडेशन ट्रस्ट की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार सहित सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब देने को कहा है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने यह नोटिस जारी किया है. दायर याचिका में देश के सभी हाई कोर्ट्स पैनलों, सरकारी विधि अधिकारी पदों और केंद्र सरकार और राज्य सरकारों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के पैनल में महिला अधिवक्ताओं के लिए न्यूनतम 30 फीसदी आरक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश देने की मांग की गई है.

अनुच्छेद 32 के तहत याचिका और संवैधानिक अधिकार

दायर याचिका में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 14, 15(3), 19 (1)(जी) और अनुच्छेद 21 के तहत महिलाओं के रोजगार की गारंटी सुनिश्चित की जाए. यह याचिका लाडली फाउंडेशन ट्रस्ट द्वारा भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई है. दायर याचिका में यह भी कहा गया है कि भारी संख्या में महिलाओं के कानून की पढ़ाई करने के बावजूद, उन्हें पेशेवर रूप से आगे बढ़ने से व्यवस्थित तरीके से रोका जा रहा है.

सरकारी मुकदमेबाजी के हर स्तर पर लागू हो कोटा

दायर अर्जी में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और सार्वजनिक क्षेत्र के निगमों को यह निर्देश दिए जाने की मांग की गई है कि वे वैधानिक रूप से महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करें. सूची के अनुसार 30 फीसदी का यह कोटा सरकारी मुकदमेबाजी से जुड़े हर स्तर पर लागू होना चाहिए.

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सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्ट्स के सरकारी वकील, सलाहकार, सरकारी कानून अधिकारी (कानून अधिकारी) के पद, कानूनी सहायता प्राधिकरणों के बारे में जानकारी, केंद्र सरकार और राज्य के अन्य विधिक पैनल, सार्वजनिक निगमों के कानूनी सलाहकार और सलाहकार क्षेत्र शामिल हैं. दायर याचिका में यह भी कहा गया है कि महिलाओं को अपनी संवैधानिक संस्था की रक्षा और उनके प्रभावशाली प्रभाव के लिए भर्ती की आवश्यकता है.



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