देश के बड़े बैंक लोन और एसेट रिकंस्ट्रक्शन मामले की जांच की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, आरबीआई (RBI), एसएफआईओ (SFIO) और विभिन्न बैंकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. सीजेआई (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस बी. मोहना की बेंच ने याचिकाकर्ता के वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दी गई जिरह के बाद यह नोटिस जारी किया है.
हालांकि, जेकेएम इंफ्रा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड की ओर से पेश वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने याचिका का विरोध करते हुए इसे खारिज करने की मांग की, लेकिन कोर्ट ने दोनों पक्षों की जिरह के बाद नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया.
जनता के पैसे को लापरवाही से बांटा- सीजेआई
सीजेआई सूर्यकांत ने लोन सेटलमेंट के तौर-तरीकों पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि यह बैंकों, एआरसी (ARC) और कर्जदारों के बीच एक गठजोड़ है. जनता के पैसे को लापरवाही से लोन के रूप में बांट दिया जाता है और इसके बाद उसे वसूलने का कोई गंभीर प्रयास नहीं किया जाता. ऐसा रवैया बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जा सकता. दायर याचिका में केंद्र सरकार, आरबीआई, एसएफआईओ, सीबीआई (CBI), ईडी (ED) और सेबी (SEBI) को जांच के निर्देश देने की मांग की गई है.
1500 करोड़ से अधिक के नुकसान का दावा
याचिकाकर्ता के अनुसार, नोएडा स्थित जेकेएम इंफ्रा प्रोजेक्ट्स पर सरकारी बैंकों का करीब 1,537 करोड़ रुपये का बकाया लोन था, जिसे कथित तौर पर एआरसी कंपनियों के माध्यम से सिर्फ 73.50 करोड़ रुपये में निपटा दिया गया. याचिकाकर्ता का दावा है कि इससे सरकारी बैंकों और सार्वजनिक धन को 1,500 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ.
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फॉरेंसिक ऑडिट का हवाला
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने एक फॉरेंसिक ऑडिट का हवाला दिया. उन्होंने कोर्ट को बताया कि इस ऑडिट के मुताबिक, बैंकों से लिए गए 912 करोड़ रुपये के लोन में से 902 करोड़ रुपये से अधिक की राशि को शेल कंपनियों को ट्रांसफर किया गया. यह पैसा फर्जी तरीके से दूसरी जगह ट्रांसफर किया गया. इसके बावजूद बैंकों ने इसे धोखाधड़ी घोषित करने के बजाय कर्ज को बेहद कम कीमत पर एआरसी को बेच दिया.
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