सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की महिला वकीलों के लिए अदालतों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और युवा वकीलों को आर्थिक सहायता देने को लेकर सख्त रुख अख्तियार किया है. कोर्ट ने केंद्र सरकार और देश के सभी राज्यों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. मामले में कोर्ट ने 17 जुलाई को अगली सुनवाई तय की है. इसके साथ ही कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल से कोर्ट की सहायता करने के लिए कहा है. सीजेआई (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस बी. मोहना की बेंच ने यह नोटिस जारी किया है.
महिला वकीलों के लिए बार रूम
महिला वकीलों द्वारा दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि देश के अनेक हाई कोर्ट, जिला अदालतों, तहसील अदालतों, ट्रिब्यूनलों और आयोगों में महिला वकीलों के लिए बार रूम और बाकी बुनियादी सुविधाएं मौजूद नहीं हैं. दायर याचिका में यह भी कहा गया है कि अधिकांश अदालतों में लेडीज बार रूम के अलावा स्वच्छ शौचालय, चेंजिंग रूम, नर्सिंग सुविधाएं और अन्य आवश्यक सुविधाएं मौजूद नहीं हैं.
मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अदालत परिसरों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना केवल प्रशासनिक आवश्यकता नहीं है, बल्कि गरिमा और समान अवसर से जुड़ा संवैधानिक दायित्व है.
आर्थिक मदद के लिए बने ‘कॉर्पस फंड’
अदालत ने युवा वकीलों की आर्थिक चुनौतियों पर भी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि प्रतिभाशाली युवा वकीलों को पेशा छोड़ने से रोकने के लिए संस्थागत सहायता व्यवहार पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए. कोर्ट ने सुझाव दिया है कि ‘यंग लॉयर्स प्रोफेशनल असिस्टेंस फंड’ या ‘यंग एडवोकेट्स कॉर्पस फंड’ बनाया जा सकता है, जिससे नए वकीलों को शुरुआती कुछ वर्षों में मासिक आर्थिक सहायता दी जा सके.
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कोर्ट ने कहा कि वकालत के शुरुआती वर्षों में आय का कोई निश्चित स्रोत नहीं होता, जिसके चलते कई प्रतिभाशाली युवा वकील आर्थिक दबाव में इस पेशे को छोड़ने पर मजबूर हो जाते हैं. इससे न्यायिक व्यवस्था को भी नुकसान होता है.
वरिष्ठ वकील भी फंड में दें योगदान
कोर्ट ने सुझाव दिया कि युवा वकीलों को शुरुआती तीन वर्षों तक पर्याप्त मासिक सहायता दी जा सकती है. इसके बाद यह सहायता राशि धीरे-धीरे कम की जाए और लगभग 6 से 7 वर्षों में समाप्त कर दी जाए, ताकि वकील तब तक आत्मनिर्भर होकर स्वतंत्र प्रैक्टिस शुरू कर सकें. अदालत ने कहा कि इस कोष (फंड) में योगदान केंद्र और राज्य सरकारों के अलावा वरिष्ठ अधिवक्ताओं तथा अन्य कानूनी पेशेवरों से भी लिया जा सकता है. साथ ही कोर्ट फीस और न्यायिक कार्यवाहियों में लगाए जाने वाले जुर्माने की राशि का एक हिस्सा भी इस फंड में डाला जा सकता है.
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