फाइल फोटो-नरेश बालियान
मकोका के तहत दर्ज मामले में गिरफ्तार आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व विधायक नरेश बालियान की नियमित जमानत याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है. सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायाधीश जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए संबंधित पक्षों को चार सप्ताह के भीतर अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.
शीर्ष अदालत अब 4 सप्ताह बाद इस जमानत याचिका पर अगली सुनवाई करेगी. इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने नरेश बालियान को जमानत देने से इनकार कर दिया था. हाई कोर्ट ने अपराध की प्रकृति को काफी गंभीर माना था. हालांकि, सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के जांच के तरीके पर भी सख्त रुख अपनाया था.
हाई कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां
- हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के वकील से पूछा था कि यदि पुलिस इसी तरह जांच जारी रखेगी, तो मामले की मुख्य सुनवाई (ट्रायल) कब शुरू होगी?
- अदालत ने सख्त लहजे में कहा था कि किसी आरोपी के लंबे समय तक जेल में रहने के दौरान जांच एजेंसी दो साल तक चुपचाप हाथ पर हाथ धरकर नहीं बैठ सकती.
- कोर्ट ने यह भी सवाल किया था कि क्या मामले में अब तक औपचारिक आरोप तय (Framing of Charges) हो चुके हैं, और यदि नहीं हुए हैं तो इसमें देरी की मुख्य वजह क्या है?
वरिष्ठ वकील विकास पाहवा की दलीलें
नरेश बालियान की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा ने अदालत के समक्ष कई कानूनी तर्क रखे
सांठगांठ और मनी ट्रेल का अभाव: बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि नरेश बालियान और ब्रिटेन में बैठे गैंगस्टर कपिल सांगवान के बीच कोई आपराधिक सांठगांठ नहीं है. जांच एजेंसियों को उनके खिलाफ वित्तीय लेन-देन या मनी ट्रेल से संबंधित कोई भी ठोस सबूत नहीं मिला है.
15वीं एफआईआर और पूर्व जमानत: वकील ने बताया कि नरेश बालियान को मूल जबरन वसूली (Extortion) मामले में पहले ही नियमित जमानत मिल चुकी थी. उस दौरान 15वीं एफआईआर में राहत देते हुए अदालत ने स्पष्ट रूप से टिप्पणी की थी कि बालियान के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं है; इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें मकोका के कठोर प्रावधानों के तहत गिरफ्तार कर लिया.
इकबालिया बयानों पर आपत्ति: वकील ने कहा कि जिन 2 सह-आरोपियों के इकबालिया बयानों के आधार पर बालियान को सिंडिकेट का हिस्सा बताया जा रहा है, वे कानूनन स्वीकार्य नहीं हैं. नियमानुसार इकबालिया बयान डीसीपी स्तर के अधिकारी द्वारा स्वतंत्र और दबावमुक्त माहौल में दर्ज किया जाना चाहिए और फिर संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश कर हस्ताक्षर होने चाहिए, लेकिन इस अनिवार्य प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया.
गैंगस्टर कपिल सांगवान का नेटवर्क
दिल्ली पुलिस की जांच के अनुसार, यह पूरा मामला नरेश बालियान और कुख्यात गैंगस्टर कपिल सांगवान के बीच हुई कथित बातचीत की ऑडियो क्लिप से जुड़ा है, जिसके आधार पर वर्ष 2023 में आधिकारिक एफआईआर दर्ज की गई थी. कपिल सांगवान एक कुख्यात गैंगस्टर है, जो पिछले पांच वर्षों से ब्रिटेन (UK) में शरण लिए हुए है. कपिल सांगवान और नरेश बालियान दोनों मूल रूप से दिल्ली के नजफगढ़ इलाके के रहने वाले हैं. सांगवान हरियाणा के बहुचर्चित नफे सिंह हत्याकांड का मुख्य मास्टरमाइंड है. इसके अतिरिक्त, कपिल सांगवान को बल्लू पहलवान और भाजपा नेता सुरेंद्र मटियाला की नृशंस हत्या की साजिश का भी मुख्य सूत्रधार माना जाता है.
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