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मणिपुर में हुई जातीय हिंसा के मामले में सीबीआई की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी अरुण खुंडोंगबम नानाओ को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

मणिपुर में महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाने और सामूहिक दुष्कर्म के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी अरुण खुंडोंगबम की जमानत पर जवाब मांगा है. सीबीआई ने इसे जघन्य अपराध बताते हुए जमानत का विरोध किया है.

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Edited by Vaibhav Gupta

मणिपुर में हुई जातीय हिंसा के मामले में सीबीआई की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी अरुण खुंडोंगबम नानाओ को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. सीबीआई द्वारा दायर याचिका में अरुण खुंडोंगबम नानाओ को मिली जमानत को रद्द करने की मांग की है. सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने ये नोटिस जारी किया है.

सीबीआई ने क्या कहा?

मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई ने कोर्ट से कहा कि आरोपियों ने महिलाओं के साथ रेप कर उन्हें नग्न अवस्था में घुमाया था, यह एक जघन्य अपराध है. जबकि पीड़िताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील निजाम पाशा ने कहा कोर्ट से पूछा कि क्या कानूनी सहायक वकील नियुक्त किए जा सकते हैं? सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि पीड़ितों के लिए कानूनी सहायता के लिए वकील की नियुक्ति के संबंध में तत्काल कार्रवाई करने को कहा है.

जुलाई 2023 में मणिपुर के वीडियों ने देश में खलबली मचा दी थी. वीडियो में कुकी जोमी समुदाय की दो महिलाओं को भीड़ नग्न कर खेत की ओर ले जा रही थी. भीड़ में मौजूद लोग महिलाओं से छेड़छाड़ रहे थे. पीड़ित महिलाओं में एक कि उम्र 20 साल और दूसरे की उम्र 40 साल थी.

CBI जांच में क्या आया सामने?

मामले की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा गया. सीबीआई जांच में सामने आया कि सार्वजनिक तौर पर यौन उत्पीड़न की घटना से पहले इलाके में जमकर उपद्रव हुआ था. मैतेई समुदाय के लोगों ने घरों में आग लगाकर एक गांव पर हमला किया और एक चर्च में आग लगा दी.

जनवरी 2026 में गुवाहाटी के एक विशेष सीबीआई अदालत में छह आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं. जिसमें चार मई 2023 को भीड़ द्वारा तीन महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाया गया था. इस दिल दहला देने वाली घटना में दो महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था और उनमें से एक के दो रिश्तेदारों की हत्या कर दी गई थी.

आरोपियों पर क्या है आरोप?

स्पेशल कोर्ट ने सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया था. आरोपियो पर कुकी और मैतेई समुदायों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने, छेड़छाड़, यौन उत्पीड़न, सामूहिक बलात्कार, शारीरिक हमला, आपराधिक साजिश, संपत्ति को नुकसान पहुचाने और लूटपाट के आरोप लगाए गए हैं. इसके अलावे उनपर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत भीगंभीर धाराएं लगाई गई हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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