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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, सहमति से बना रिश्ता टूटने पर नहीं बनता आपराधिक मामला

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपसी सहमति से बने संबंध के बिगड़ने पर इसे आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता. कोर्ट ने महाराष्ट्र के एक मामले में आरोपी पर दर्ज बलात्कार का केस रद्द किया, यह कहते हुए कि केवल रिश्ता टूटने से अपराध साबित नहीं होता.

Supreme Court
Edited by Akansha

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि आपसी सहमति से बना रिश्ता अगर बाद में बिगड़ जाए या साथी एक-दूसरे से दूर हो जाए, तो इसे आपराधिक मामला बनाने का आधार नहीं हो सकता है. ऐसा करना न केवल अदालतों पर अनावश्यक बोझ डालता है बल्कि आरोपी की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचाता है. जस्टिस बी. वी नागरत्ना और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने यह टिप्पणी की है.

कोर्ट ने अपने फैसले में कही ये बात

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यदि एफआईआर में किए गए सभी आरोप भी सही माने जाएं, तब भी यह प्रतीत नही होता कि महिला की सहमति उसकी इच्छा के विरुद्ध ली गई थी या केवल शादी के आश्वासन पर शारीरिक संबंध बने. कोर्ट ने यह भी कहा कि यह ऐसा मामला नहीं है जहां शुरू से ही शादी का झूठा वादा किया गया हो. केवल एक सहमति पर आधारित रिश्ता खराब हो जाना आपराधिक कार्रवाई का आधार नहीं हो सकता.

कोर्ट ने लगाया था आरोप

कोर्ट ने महाराष्ट्र के सतारा में एक महिला ने एक पुरूष पर शादी का झूठा झांसा देकर बलात्कार का आरोप लगाया था. महिला ने जुलाई 2023 में कथित आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कराया था. जिसके बाद मामला निचली अदालत होते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचा और बॉम्बे हाईकोर्ट ने आरोपी की याचिका को खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा था.

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सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ दर्ज मामले को किया रद्द

बाद में आरोपी ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की जिसपर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ दर्ज मामले को रद्द कर दिया. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी की उम्र 25 साल है और उसके भविष्य को देखते हुए उसके खिलाफ दर्ज मामले को खत्म किया जाता है. महिला ने 2022 में अपने पति से तलाक लिया था.

बता दें कि शादी से बाहर किसी और से संबंध रखना पहले अपराध की श्रेणी में आता था.आईपीसी की धारा 497 के तहत इसमें पांच साल की सजा का प्रावधान था. हालांकि इस धारा के तहत सिर्फ पुरुषों को ही सजा मिलती थी, जिसको लेकर विवाद था.

-भारत एक्सप्रेस 


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