Free Education in Private Schools: सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों को शिक्षा का अधिकार कानून के तहत निजी स्कूलों को मुफ्त शिक्षा के लिए शामिल करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने इसको लेकर देश के सभी राज्यों को सर्वे का निर्देश दिया है. जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने सभी राज्यों से कहा है कि वह चार सप्ताह में इस बारे में अधिसूचना जारी करें.
कोर्ट ने राज्यों से इस बात को लेकर सर्वे करने को कहा है कि उनके यहां कितने अनाथ बच्चे हैं और उनमें से कितनों को स्कूल में दाखिला मिला है.
राज्यों से मांगा गया अनाथ बच्चों और उनके दाखिले का डेटा
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि मेघालय, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, गुजरात और दिल्ली जैसे राज्य पहले ही अधिसूचना जारी कर चुके है. यह याचिका अधिवक्ता पौलोमी पवनी शुक्ला की ओर से दायर की गई है. दायर याचिका में कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए तय 25 प्रतिशत कोटा के तहत अनाथ बच्चों को स्कूलों में प्रवेश देने की मांग की गई है.
दायर याचिका में गंभीर चिंता जताई गई थी कि अधिकतर राज्यों ने न तो इस दिशा में कोई नीति बनाई है और ना ही उनके पास इसको लेकर कोई डेटा है. याचिकककर्ता ने यह भी कहा कि UNICEF के अनुसार करीब ढाई करोड़ अनाथ बच्चे हैं. उन्होंने कहा कि भारत में कमजोर वर्गों के लिए छात्रवृत्ति, आरक्षण, नौकरियां और लोन की व्यवस्था है, लेकिन अनाथ बच्चों के लिए कोई ठोस नहीं नही है.
याचिकाकर्ता ने मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र को 2027 में होने वाले जनगणना में अनाथों का डेटा शामिल करने पर विचार करने का कोर्ट से अनुरोध किया. वही केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिकाकर्ता की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि ऐसा होना चाहिए. मैं इस मामले को उठाऊंगा क्योंकि अनाथ बच्चे हमारी जिम्मेदारी हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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