सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़ा चाइल्ड कस्टडी के मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि एक महिला ने भारत और ब्रिटेन की न्यायिक प्रणाली को धोखा दिया है. जिसका कारण वह खुद जानती है. जस्टिस जे के महेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने यह टिप्पणी की है. कोर्ट ने नाबालिग बेटे की कस्टडी उसके पिता को सौपनें का आदेश दिया है. कोर्ट ने बेटे की कस्टडी 30 सितंबर तक सौपनें का आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कस्टडी सौपें जाने के बाद माता-पिता एक महीने की अवधि के भीतर सक्षम अदालत के समक्ष संरक्षक एवं प्रतिपाल्य अधिनियम 1890 के प्रावधानों के तहत उचित कार्यवाही दायर करेंगे.
वैवाहिक विवाद से बच्चों पर पड़ा असर
कोर्ट ने कहा लड़के की मां या भाई-बहन को हर शनिवार शाम पांच बजे से सात बजे तक ऑडियो या वीडियों देखने का अधिकार होगा. महिला के आचरण की निंदा करते हुए कहा कि यह मामला महिला और उसके पति के बीच रहे गहरे संघर्ष को दर्शाता है. जो भारत में एक साथ रहने और अपने बच्चों के पालन-पोषण के संबंध में उनके अलग-अलग इरादों से उत्पन्न हुआ है. कोर्ट ने कहा कि इस विवाद से न केवल उनके वैवाहिक संबंध खराब हुए हैं, बल्कि उनके दो बच्चों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है. जिनमें से एक बच्चा अपनी मां के साथ यूनाइटेड किंगडम में रह रहा है.
कोर्ट ने कहा कि नवंबर 2010 में विवाह करने वाले दंपत्ति के बीच संबंधों में लंबे समय से अनबन जारी थी और दो बच्चों से मिलने को लेकर विवाद बढ़ गया. कोर्ट ने कहा यह महज अहंकार का टकराव नहीं है, बल्कि प्रथम दृष्टया यह चिंताजनक मानसिकता को दर्शाता है, जिसका असर नाबालिग बच्चों पर पड़ा है. कोर्ट ने यह आदेश महिला के पति की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद दिया है.
पति ने कोर्ट को बताया कि मई 2021 में उसे बताए बिना दोनों बच्चों को लेकर ब्रिटेन चली गई. इसके लिए उसने कोई सहमति भी नही जताई है.
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-भारत एक्सप्रेस
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