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सुप्रीम कोर्ट ने MP के रहने वाले कानून के छात्र को तुरंत रिहा करने का दिया आदेश, जानें क्या है पूरा मामला

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट (Supreme Court) ने पाया कि जेल के डिटेंशन सेंटर में रखे गए छात्र की हिरासत न केवल असंवैधानिक है, बल्कि नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया है.

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मध्य प्रदेश के रहने वाले एक कानून के छात्र को रिहा करने का तुरंत आदेश दिया है. जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने यह आदेश दिया है.

Supreme Court ने क्या कहा?

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट (Supreme Court) ने पाया कि जेल के डिटेंशन सेंटर में रखे गए छात्र की हिरासत न केवल असंवैधानिक है, बल्कि नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया है. कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि जिस तरह से छात्र को डिटेंशन में लिया गया है, वह राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 की धारा 3(2) की शर्तों को पूरा नहीं करता है. कोर्ट ने कहा कि जब छात्र पहले से ही अन्य आपराधिक मामलों में जेल में बंद था, तो उसकी डिटेंशन की जरूरत क्या थी. इसकी जांच क्यों नही की गई.

कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि छात्र को 28 जनवरी 2025 को जमानत मिल जाने के बावजूद वह एएसए के आदेश के चलते जेल में बंद है. इसलिए यह हिरासत अवैध है. इसमें नियमों की घोर अनदेखी की गई है.

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यह छात्र 11 जुलाई 2024 को हिरासत में लिया गया था और उसके बाद से उसकी हिरासत को चार बार बढ़ाया गया. पिछली बार हिरासत की अवधि को 12 जुलाई 2025 तक के लिए बढ़ा दिया गया था. जिसके बाद छात्र की ओर से हिरासत में रखे जाने को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी, लेकिन हाई कोर्ट ने छात्र की ओर से पेश वकील की दलीलों से संतुष्ट नही हुआ और उसकी याचिका को खारिज कर दिया. जिसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुचा और सुप्रीम कोर्ट में हिरासत में रखे जाने को उसने चुनौती दी.

-भारत एक्सप्रेस



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