सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट कारोबारी अंसल बंधुओं द्वारा जमा कराए गए 60 करोड़ रुपए से बनने वाले ट्रामा सेंटर का निरीक्षण करने का आदेश दिया है. जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यह आदेश दिया है. पिछली सुनवाई में दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि 1997 के उपहार अग्निकांड के पीड़ितों के लिए रियल एस्टेट कारोबारी अंसल बंधुओं द्वारा जमा कराए गए 60 करोड़ रुपए का इस्तेमाल तीन सरकारी अस्पतालों में ट्रामा सेंटर बनाने में किया जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने उपहार त्रासदी पीड़ित एसोसिएशन की ओर से दायर की गई है.
दोषियों की लापरवाही पर उठाया सवाल
कोर्ट ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील जयंत मेहता को निरीक्षण के लिए किसी को नियुक्त करने का निर्देश दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने दावा किया कि दोषियों ने कोर्ट द्वारा दिखाई गई उदारता का लाभ उठाया है. लेकिन उस समय सौंपी गई जिम्मेदारियों को पूरा नहीं किया है. वकील ने यह भी कहा कि कोर्ट के निर्देशों के अनुसार दिल्ली विद्युत बोर्ड को 5 एकड़ भूमि आवंटित करनी थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया.
कोर्ट ने दिल्ली सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे से पूछा कि अंसल बंधुओं से 60 करोड़ रुपए की पूरी जुर्माने की राशि प्राप्त कर ली गई है और उसका उपयोग किया जा चुका है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि 60 करोड़ की राशि कम है.
ट्रामा सेंटर निर्माण में देरी पर कड़ा रुख अपनाया
बता दें कि वर्ष 1997 में दिल्ली के उपहार सिनेमा अग्निकांड में 59 लोगों की मौत हो गई थी. सालों तक चली सुनवाई के बाद इस मामले में उपहार सिनेमा के मालिक अंसल बंधुओं जिम्मेदार ठहराया गया. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अंसल बंधुओं को को 60 करोड़ रुपए दिल्ली सरकार के पास जमा कराने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने इस रकम से द्वारका में ट्रामा सेंटर का निर्माण कराने का आदेश दिया था, लेकिन द्वारका में इस रकम का इस्तेमाल नहीं किया गया.
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