सुप्रीम कोर्ट ने विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं के लिए ग्रुप सी और डी की नौकरियों से छूट की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है.
यह याचिका पनुन ट्रस्ट की ओर से दायर की गई थी.
मुद्दों पर संबंधित मंत्रालय जाए- SC
जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि यह मामला नीतिगत मामला है. लिहाजा सरकार के पास जाए. क्या आप चाहेंगे कि मैं इस स्टोरी को सोशल मीडिया पोस्ट के लिए छोटा और इम्पैक्टफुल वर्जन भी बना दूँ? कोर्ट ने कहा कि ऐसे मुद्दों पर संबंधित मंत्रालय या हाई कोर्ट जाना चाहिए. कोर्ट ने स्पष्ट किया गया वह इस स्तर पर सीधे हस्तक्षेप नहीं करेगा.
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि 1984 के.सिख विरोधी दंगों और 2002 के गुजरात दंगों के पीड़ितों को सरकार ने आयु में छूट सहित अन्य रियायतें दी थी. लेकिन वही कश्मीरी हिंदुओं को समान लाभ से वंचित रखा गया है, जो कि संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता के अधिकार) का उल्लंघन है.
नौकरियों में मिले सामान्य तरह का लाभ
याचिकाकर्ता पनुन कश्मीर ट्रस्ट का कहना था कि तीन दशकों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कश्मीरी हिंदू समुदाय के लिए कोई ठोस पुनर्वास नीति लागू नहीं हुई है. दायर याचिका में मांग की गई थी कि उन्हें भी केंद्र सरकार की नौकरियों में उसी तरह का लाभ मिले जैसा अन्य दंगा या हिंसा पीड़ित समुदायों को मिला.
याचिका में कहा गया था कि 1990 में कश्मीरी हिंदुओं के बड़े पैमाने पर विस्थापित हुआ, लेकिन अब तक उन्हें केंद्र सरकार की नौकरियों में आयु सीमा में कोई विशेष छूट नहीं दी गई.
ये भी पढ़ें: ईसाई धर्म अपनाने के बाद भी अनुसूचित जाति का दावा नहीं कर सकते: सुप्रीम कोर्ट
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


