सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर टेरर फंडिंग मामले में अलगाववादी नेता शब्बीर शाह की ओर से दायर जमानत याचिका पर एनआईए से हिरासत का ब्यौरा देने का निर्देश दिया है. जस्टिस विक्रमनाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने एनआईए से चार सप्ताह में जवाबी हलफनामा देने को कहा है. कोर्ट 31 अक्टूबर को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि शाह के खिलाफ संभवतः 24 मामले दर्ज थे.
दिल्ली हाई कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद शब्बीर अहमद शाह ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया हैं. शब्बीर शाह के खिलाफ कुल 24 मामले दर्ज है. शब्बीर शाह को एनआईए ने 2019 में गिरफ्तार किया था. दिल्ली हाई कोर्ट में जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान शब्बीर शाह की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंजाल्विस ने कहा था कि वह पिछले छह साल से तिहाड़ जेल में बंद है. उनके खिलाफ अभी तक कोई अपराध साबित नही हुआ है.
शब्बीर शाह के खिलाफ दर्ज 24 मामलों में से 18 मामलों में उन पर आरोप लगाया गया है जबकि तीन मामले लंबित है और तीन को खारिज कर दिया गया है. गोंजाल्विस ने यह भी कहा कि एनआईए की ओर से दाखिल चार्जशीट के मुताबिक कुल 400 गवाह है, जिनमें से मात्र 15 गवाहों की गवाही पूरी हो पाई है.
जमात-उद-दावा प्रमुख हाफिज सईद से संबंध
इसको देखते हुए शाह को जमानत मिलनी चाहिए क्योंकि इस मामले में ट्रायल लंबा चलने की उम्मीद है जबकि एनआईए ने जमानत का विरोध करते हुए कहा था कि ये एक गंभीर अपराध हैं, जिसमें पाकिस्तान समेत दूसरे देशों से कश्मीर में अशांति फैलाने के लिए टेरर फंडिंग को अंजाम दिया गया. इस अपराध में शब्बीर शाह ने खास भूमिका निभाई है. शब्बीर शाह जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफिज सईद के भी संपर्क में था. शब्बीर शाह दो मामलों में तिहाड़ जेल में बंद है. उसपर टेरर फंडिंग का आरोप है. साथ ही ईडी ने उसके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत मामला दर्ज किया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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