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NEET प्रदर्शन केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: बिना क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले छात्रों को तुरंत रिहा करने के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई सूर्यकांत की पीठ ने नीट पेपर लीक प्रदर्शनों में हिरासत में लिए गए बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले छात्रों को रिहा करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने यूपी, दिल्ली, बंगाल समेत कई राज्यों को नोटिस जारी किया है.

मैरिटल रेप पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई.

भारत में वैवाहिक दुष्कर्म की संवैधानिकता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई, जिसमें केंद्र और राज्यों के रुख पर फैसला होना है. (PC: भारत एक्सप्रेस)

नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले में छात्र आंदोलनों के दौरान हुई पुलिसिया कार्रवाई और लाठीचार्ज से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने एक ऐतिहासिक और बड़ा आदेश जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट ने देश के विभिन्न राज्यों की पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए ऐसे सभी बेकसूर छात्रों को तुरंत रिहा किया जाए, जिनका पहले से कोई भी आपराधिक रिकॉर्ड (क्रिमिनल बैकग्राउंड) नहीं है.

3 अगस्त को होगी अगली महासुनवाई

माननीय मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की विशेष खंडपीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश (UP), दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, केरल सहित अन्य प्रभावित राज्यों की सरकारों को आधिकारिक नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब मांगा है. इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने इन सभी संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों (Chief Secretaries) को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट के समक्ष पेश होने का कड़ा निर्देश दिया है. सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में आगामी 3 अगस्त 2026 को अगली सुनवाई करेगा.

छात्रों पर ज्यादतियों की निष्पक्ष जांच जरूरी

मामले की लाइव सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान उपद्रव व हिंसा करने वालों और कानून को अपने हाथ में लेने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई जरूर होनी चाहिए. हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने दो टूक कहा कि शांतिपूर्ण छात्रों पर पुलिस की ज्यादतियों और अत्यधिक बल प्रयोग से जुड़े सभी संगीन आरोपों की एक निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच (इंडिपेंडेंट इंक्वायरी) होना भी परम आवश्यक है. सीजेआई ने कहा कि यदि तय प्रशासनिक और कानूनी नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो कानून को बिना किसी भेदभाव के अपना काम करना चाहिए. उन्होंने कहा-

“स्वतंत्र जांच का प्रथम दृष्टया (ऑन द फेस ऑफ इट) मजबूत मामला बनता है. जिसने भी अपनी सीमा लांघकर ज्यादती की है, कानून उस पर अपना काम करेगा. यदि इस पूरे मामले में किसी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय नहीं की जाती, तो ऐसी जांच का कोई अर्थ नहीं रह जाता.”

सीजेआई सूर्यकांत ने आगे कहा कि पुलिस की ज्यादतियों और भीड़ नियंत्रण से निपटने के लिए न्यायपालिका द्वारा अब तक तय किए गए सभी प्रमुख न्यायिक सिद्धांतों (ज्यूडिशियल प्रेसिडेंट्स) को एक साथ एक मंच पर लाने का समय अब पूरी तरह आ गया है.

वरिष्ठ वकीलों की तीखी दलीलें

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने कोर्ट के सामने कड़ी शर्त रखी. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित होने वाली विशेष जांच टीम (SIT) का प्रमुख केवल और केवल देश का कोई पूर्व सीजेआई (Former CJI) ही होना चाहिए; इससे कम पर कोई भी समझौता मंजूर नहीं है. उन्होंने कोर्ट का ध्यान आकर्षित करते हुए बताया कि इन तमाम अदालती कार्यवाहियों के बावजूद बीते कल ही बिहार में एक पुलिसकर्मी द्वारा प्रदर्शनकारियों पर सीधे AK-47 राइफल का इस्तेमाल किया गया.

वहीं, एक अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने कोर्ट में तर्क दिया कि विश्वसनीय मीडिया रिपोर्ट्स और दिल्ली के कनॉट प्लेस (CP) व अन्य इलाकों से मिली सीसीटीवी व मीडिया फुटेज स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किस स्तर की पुलिसिया ज्यादती हुई है.

इस पर सीजेआई ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत को नहीं लगता कि इस निर्विवाद मामले में बहुत लंबी-चौड़ी दलीलों की आवश्यकता है. सीजेआई ने माना कि यह छात्रों का पूरी तरह से एक शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन था, जिसमें उनकी कुछ वाजिब मांगें रखी गई थीं और यह पूरी तरह से संविधान के दायरे में था. उन्होंने कहा कि अक्सर ऐसे शांतिपूर्ण नागरिक आंदोलनों में बिन बुलाए अराजक मेहमान अपने अलग एजेंडे के साथ घुस आते हैं और बहुत जल्द वे सह-आयोजक बनकर माहौल को हिंसक बना देते हैं.

SIT के गठन पर बाद में आएगा फैसला

सर्वोच्च न्यायालय ने छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक या जबरन कार्रवाई करने और हिरासत के दौरान जब्त उनके निजी डिजिटल डेटा (जैसे मोबाइल चैट्स और व्यक्तिगत तस्वीरें) को सार्वजनिक या प्रकाशित करने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है.

छात्रों के वकीलों ने कोर्ट में गुहार लगाई थी कि संवैधानिक अधिकार होने के बावजूद पुलिस द्वारा उनके साथ अपराधियों जैसा सुलूक किया गया. सुप्रीम कोर्ट ने आश्वस्त किया कि डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों के आधार पर इस पूरे मामले की एक गहन वैज्ञानिक जांच की जाएगी और इसकी जांच के लिए गठित की जाने वाली विशेष समिति (कमेटी/एसआईटी) के प्रारूप के बारे में कोर्ट बाद में आधिकारिक रूप से जानकारी देगा.

250 पुलिसकर्मी भी हुए हैं घायल- तुषार मेहता

केंद्र सरकार और पुलिस प्रशासन की ओर से पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने अदालत को दूसरा पहलू भी समझाया. उन्होंने कहा कि देश के निर्दोष छात्र कभी भी पुलिसकर्मियों के खिलाफ हिंसक गतिविधियों में शामिल नहीं होंगे, लेकिन इस पूरे आंदोलन में कुछ बेहद खतरनाक शरारती तत्वों (मिसक्रिएन्ट्स) की घुसपैठ हो गई थी.

सॉलिसिटर जनरल ने खुलासा किया कि हत्या, दुष्कर्म (रेप) और एनडीपीएस (NDPS – ड्रग्स कानून) जैसे संगीन आपराधिक मामलों में लिप्त कई दागी और शरारती तत्व छात्रों के इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए थे और उन्होंने अग्रिम मोर्चे पर मुस्तैद पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमले व हिंसा की. एसजी मेहता ने बताया कि इस हिंसक झड़प में करीब 250 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए हैं.

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उन्होंने कोर्ट से अपील करते हुए कहा कि छात्रों को संविधान के तहत शांतिपूर्ण विरोध करने का पूरा अधिकार है और यदि किसी ने कानून तोड़ा है तो उसे सजा मिलनी चाहिए, लेकिन एक राज्य के तौर पर सरकार ऐसा कोई भी कदम नहीं उठा सकती जिससे ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों का मनोबल टूटे. उन्होंने कहा कि पूरी निष्पक्ष सच्चाई अदालत के सामने आनी चाहिए.



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