सुप्रीम कोर्ट ने पटना में गंगा नदी के पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील डूब क्षेत्र (फ्लड प्लेन) में हो रहे अवैध निर्माणों और अतिक्रमण पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है. सर्वोच्च अदालत ने बिहार सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह पटना के नौजर घाट से नूरपुर घाट के बीच मौजूद सभी अवैध ढांचों को अगले 8 सप्ताह के भीतर हर हाल में हटाना सुनिश्चित करे. अदालत ने सख्त लहजे में कहा है कि यह राज्य सरकार को दिया जाने वाला आखिरी और अंतिम मौका है.
बेंच ने दिया 6 हफ्ते का समय
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि इससे पहले भी 21 जुलाई को राज्य सरकार को 6 हफ्ते का समय दिया गया था.
सुनवाई के दौरान बिहार सरकार के महाधिवक्ता एस.डी. संजय ने कोर्ट को बताया कि अदालती आदेशों का आंशिक पालन हुआ है. उन्होंने दलील दी कि नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा के कारण गंगा का जलस्तर बढ़ा हुआ है, जिससे जलभराव के चलते अधिकारियों के लिए बुलडोजर चलाना और कार्रवाई आगे बढ़ाना फिलहाल मुमकिन नहीं हो पा रहा है.
‘पालन नहीं हुआ तो मुख्य सचिव होंगे तलब’
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की इस मजबूरी को सुनते हुए 8 हफ्ते की मोहलत तो दी, लेकिन साथ ही गंभीर चेतावनी भी जारी कर दी. कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि अगर दी गई समयसीमा के भीतर निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन नहीं हुआ, तो बिहार के मुख्य सचिव (Chief Secretary) सहित अन्य संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में तलब किया जाएगा.
इसके अलावा, अदालत अवमानना (Contempt of Court) की सख्त कार्यवाही शुरू करने से भी पीछे नहीं हटेगी.
145 अवैध कब्जे अब भी बरकरार
इससे पहले 12 मार्च 2026 को हुई सुनवाई में भी कोर्ट ने भारी नाराजगी जताई थी, जब यह सामने आया कि दीघा घाट से नौजर घाट के बीच चिह्नित 213 अवैध कब्जों में से महज 58 को ही हटाया गया था और 145 अतिक्रमण जस के तस बने हुए थे.
बता दें कि यह पूरा विवाद NGT के जून 2020 के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका से जुड़ा है, जिसमें ट्रिब्यूनल ने गंगा के फ्लड प्लेन में पक्के निर्माण के खिलाफ दायर अर्जी को खारिज कर दिया था. अब सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई पर पूरी अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का फरमान सुनाया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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