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प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत ईडी की शक्तियों को लेकर दायर पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 6 मार्च को करेगा सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट आज, 6 मार्च को ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट’ (PMLA) के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ED) की शक्तियों को लेकर दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई करेगा. जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ इन याचिकाओं पर विचार करेगी.

PMLA Case Supreme Court ED Powers Review
Edited by Vaibhav Gupta

प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत प्रवर्तन निदेशालय के शक्तियों और सीमाओं को लेकर दिए गए फैसले के बाद दायर पुर्नविचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 6 मार्च को सुनवाई करेगा. जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई करेगी.

पुनर्विचार याचिका का विरोध

पिछली सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दायर पुनर्विचार याचिका का विरोध किया था. उन्होंने कहा था कि दायर पुनर्विचार याचिका सुनवाई योग्य नहीं है. जबकि याचिककर्ताओ की ओर से पेश वकीलों ने कहा था कि इस पर सुनवाई होनी चाहिए. कोर्ट कार्ति चिदंबरम सहित अन्य की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई कर रहा है.

पिछली सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि जिरह की तैयारी के लिए समय चाहिए. जिसके बाद कोर्ट ने 2 सप्ताह का समय दे दिया था.

ECIR एक आंतरिक दस्तावेज

2022 के फैसले में विजय मदनलाल चौधरी मामले में गिरफ्तारी, जब्ती, निर्दोष होने का अनुमान, कड़ी जमानत की शर्तो आदि से संबंधित PMLA के प्रावधानों के संवैधानिक वैधता को कोर्ट ने बरकरार रखा था. कोर्ट ने यह माना था कि पीएमएलए कार्यवाही के तहत प्रवर्तन सूचना रिपोर्ट यानी ECIR की आपूर्ति अनिवार्य नहीं है, क्योंकि ECIR एक आंतरिक दस्तावेज है और इसे प्रथम सूचना रिपोर्ट के बराबर नहीं किया जा सकता है.

कोर्ट ने दो मुद्दों की पहचान की थी, जिन पर प्रथम दृष्टया विचार करने की आवश्यकता है. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि फैसले पर पुनर्विचार की आवश्यकता है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह प्रत्येक पक्ष को अपनी दलीलें पेश करने और मामले से संबंधित कानूनी मुद्दों पर विचार करने का पर्याप्त अवसर देगी.

PMLA स्वतंत्र अपराध नहीं

इससे पहले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने फैसले के पुनर्विचार का विरोध किया था और कहा कि पीएमएलए एक स्वतंत्र अपराध नहीं है और पीएमएलए को वित्तीय कार्रवाई कार्य बल द्वारा जारी निर्देशों के अनुरूप विधायिका द्वारा तैयार किया जाता है. याचिकाओं में धन शोधन निवारण अधिनियम के प्रावधानों को चुनौती दी गई थी.

याचिकाओं में पीएमएलए के तहत अपराध की आय की तलाशी, गिरफ्तारी, जब्ती, जांच और कुर्की के लिए ईडी को उपलब्ध शक्तियों के व्यापक दायरे को चुनौती दी गई. इसमें कहा गया है कि ये प्रावधान मौलिक अधिकारों का हनन करते हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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