सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश से संबंधित मामले में दायर एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल खड़ा किया है. कोर्ट ने इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन को कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि आपने यह याचिका क्यों दायर की? क्या आप देश के मुख्य पुजारी है? कोर्ट ने कहा कि इस याचिका को शुरुआत में ही खारिज कर देना चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जनहित याचिका अब पब्लिसिटी इंटरेस्ट, प्राइवेट इंटरेस्ट, पैसा इंटरेस्ट और पॉलिटिकल इंटरेस्ट लिटिगेशन में बदल गई है. कोर्ट ने कहा आपके पास और कोई काम नही है क्या? कोर्ट ने कहा कि जनहित याचिका कानून की प्रोसेस का गलत इस्तेमाल है और एसोसिएशन को ऐसी जनहित याचिका फ़ाइल करने के बजाए बार और अपने युवा सदस्यों की भलाई के लिए काम करना चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी और PIL पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट में धार्मिक जगहों पर महिलाओं के साथ भेदभाव और अलग-अलग धर्मों में धार्मिक आजादी के दायरे से जुड़ी याचिकाओं पर 11 वें दिन की सुनवाई चल रही है. मामले की सुनवाई के दौरान याचिककर्ताओ ने संविधान पीठ के समक्ष अहम सवाल उठाया कि अनुच्छेद 25 और अनुच्छेद 26 में नैतिकता शब्द की व्याख्या कैसे की जाए, जो धार्मिक स्वतंत्रता पर एक सीमा के रूप में लागू होता है.
याचिककर्ताओ ने दलील देते हुए कहा कि संवैधानिक नैतिकता का कोई स्थान नहीं है, क्योंकि यह व्यक्तिपरक है और सार्वजनिक नैतिकता ही मान्य होनी चाहिए, जो संसद के माध्यम से लोगों की इच्छा को दर्शाती है. वही वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा कि नैतिकता को बहुसंख्यक समाज की सोच से निर्धारित नहीं किया जा सकता, क्योंकि सामाजिक नैतिकता पूर्वाग्रहों से प्रभावित हो सकती है.
उन्होंने कहा कि महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध शुद्धता और अशुद्धता की अवधारणा पर आधारित है, जो अनुच्छेद 17 और समानता के अधिकार का उल्लंघन है.
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-भारत एक्सप्रेस
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