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सुप्रीम कोर्ट ने निलंबित एडीजीपी एच.एम. जयराम मामले में तमिलनाडु सरकार से 24 घंटे में मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने अपहरण के मामले में गिरफ्तार और निलंबित एडीजीपी एच.एम. जयराम के निलंबन पर सवाल उठाए हैं और तमिलनाडु सरकार से 24 घंटे में जवाब मांगा है. कोर्ट ने निलंबन को मनोबल गिराने वाला कदम बताया.

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट.

अपहरण के मामले में गिरफ्तार निलंबित एडीजीपी एच. एम जयराम के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से जवाब मांगा है. सुप्रीम कोर्ट तमिलनाडु सरकार से 24 घंटे में यह बताने को कहा है कि क्या एडीजीपी एच. एम जयराम के निलंबन को वापस लिया जा सकता है क्या?  जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने कहा कि वह एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी हैं. उन्हें निलंबित करने की क्या आवश्यकता थी? इस तरह के आदेश चौंकाने वाले और मनोबल गिराने वाले हैं. उनका निलंबन वापस लिया जाना चाहिए.

मामले की सुनवाई के दौरान तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि जयराम को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया गया. वही एडीजीपी एच. एम जयराम के वकील ने कोर्ट को बताया कि गिरफ्तार किया गया था, उन्हें छोड़ दिया गया लेकिन उनको राज्य सरकार ने निलंबित कर दिया है.

जयराम की गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता

कोर्ट 19 जून को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. मद्रास हाईकोर्ट ने इस मामले में एक और आरोपी विधायक एम जगन मूर्ति द्वारा दायर एक अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए तमिलनाडु पुलिस को जयराम को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया था.

जयराम ने मद्रास हाईकोर्ट द्वारा दिए गए उनकी गिरफ्तारी के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. तिरुवलंकाडू पुलिस ने अपहरण मामले में जयराम की लिप्तता की आशंका व्यक्त की थी. जिसकी जांच कर रिपोर्ट देने को जयराम के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था. हालांकि जयराम तीस जून को रिटायर्ड होने वाले हैं.

जयराम को तिरुवल्लूर जिले के थिरुवलंगड में प्रेम-विवाह विवाद में 15 वर्षीय लड़के के अपहरण के मामले में हाई कोर्ट ने गिरफ्तार करने का आदेश दिया था. बताया गया है कि किशोर का अपहरण उन लोगों ने किया था जो उसके बड़े भाई के बारे में जानकारी हासिल करना चाहते थे. जिसने थेनी जिले की एक युवती से परिवार के इच्छा के विरोध के बावजूद विवाह कर लिया था.

अपहृत किशोर की मां की शिकायत में गंभीर आरोप

मद्रास हाईकोर्ट ने विधायक पर राजनीतिक दबाव डालकर वैधानिक जांच को बाधित करने का भी आरोप लगाया है. यह शिकायत अपहृत किशोर की मां ने दर्ज कराया गया है, जिसमें आरोप है कि कुछ लोग उनके बड़े बेटे को ढूढते हुए कलंबक्कम स्थित उनके घर में जबरन घूस आए थे. जब बड़ा बेटा नही मिला तो आरोपियों ने छोटे बेटे को अगवा कर लिया.

शिकायत में यह भी कहा गया है कि अपहरणकर्ता खुद को पुलिसकर्मी बताकर आए थे, और बाद में उस किशोर को एडीजीपी जयराम के वाहन से एक होटल के पास छोड़ दिया. पुलिस की माने तो तमिलनाडु पुलिस विभाग के विशेष डीजीपी रहे राजेश दास समेत कई वरिष्ठ अधिकारी पहले भी इस तरह के कृत्य में पकड़े जा चुके हैं. इस कृत्य के कारण अधिकारियों की सेवानिवृति में दिक्कतें आएगी, साथ ही उन्हें मिलने वाली पेंशन का लाभ भी प्रभावित होगा.

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-भारत एक्सप्रेस 



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