सुप्रीम कोर्ट
असम सरकार की ‘पुश-बैक नीति’ के खिलाफ याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है. मामले सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि आप गुवाहाटी हाई कोर्ट क्यों नही गए. कोर्ट ने कहा कि 69 लोगों को डिपोर्ट किया जा रहा है. जस्टिस संजय करोल और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की वेकेशन बेंच ने सुनवाई से इंकार कर दिया. यह याचिका बीटीसी माइनॉरिटी स्टूडेंट्स यूनियन की ओर से दायर की गई थी.
दायर याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार अवैध प्रवासियों को निवर्सित करने के बहाने मनमाने ढंग से वास्तविक भारतीय नागरिकों को बांग्लादेश की सीमा की ओर धकेल रही है. याचिका में यह भी तर्क दिया गया था कि यह संविधान द्वारा गारंटीकृत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है.
नागरिकता साबित न कर पाने वालों को नहीं मिल रही सुनवाई
याचिका में दावा किया गया था कि इस तरह की कार्रवाइयों से असम के धुबरी, दक्षिण सालमारा और गोलपाड़ा जैसे जिलों में रहने वाले वे लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं जो न तो अपनी नागरिकता साबित कर पा रहे हैं और न ही न्यायिक सुनवाई पा रहे हैं. यह पूरी प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 का सीधा उल्लंघन मानी जा रही हैं. जिसमें हर व्यक्ति को समानता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार दिया गया है.
वहीं याचिका में यह भी कहा गया था कि 4 फरवरी 2025 को दिए गए सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का हवाला दिया है, जिसमें पहले से घोषित 63 विदेशियों को दो सप्ताह के भीतर उनके देश भेजने का निर्देश दिया गया था.
याचिका में दावा किया गया था कि इस आदेश की आड़ में अब राज्य सरकार ने व्यापक अभियान शुरू कर दिया है, जिसमें उन लोगों को भी शामिल किया जा रहा है जिनकी नागरिकता की न तो जांच हुई है और न ही उन्हें अपनी बात कहने का.अवसर मिला है.
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-भारत एक्सप्रेस
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