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राज्यसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार

राज्यसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार किया. मामला जस्टिस बेला त्रिवेदी की पीठ को 28 अप्रैल को भेजा गया है.

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Aarika Singh Edited by Aarika Singh

लोकसभा के तर्ज पर राज्यसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीट आरक्षित करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से सीजेआई ने इनकार करते हुए मामले को दूसरे बेंच के पास भेज दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है. सीजेआई संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि लोकसभा और विधानसभा में आरक्षण से संबंधित मामले की सुनवाई दूसरी बेंच ने किया है, लिहाजा वही बेंच इस मामले में भी सुनवाई करेगी. कोर्ट ने जस्टिस बेला त्रिवेदी की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष 28 अप्रैल को सूचीबद्ध करने को कहा है.

इससे पहले लोकसभा में महिला आरक्षण को लेकर दायर याचिका को जस्टिस बेला त्रिवेदी की अध्यक्षता वाली बेंच ने 10 जनवरी 2025 को तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया था. यह याचिका मध्य प्रदेश कांग्रेस नेता डॉक्टर जया ठाकुर और नेशनल फेडरेशन इंडियन वूमेन की ओर से दायर की गई थी. जस्टिस एम बेला त्रिवेदी और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिकाओं पर विचार करने के इच्छुक नही है. अदालत ने कहा था कि जया ठाकुर और अन्य ने उस विधेयक को चुनौती दी है जो अब कानून बन गया है. अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि पहले भी संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण का मुद्दा उठाया गया, मगर इसे कभी लागू नही किया जा सका.

परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने की शर्त को किया जा रहा लागू

हालांकि इस बार इसे परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने की शर्त पर लागू किया जा रहा है. जस्टिस बेला त्रिवेदी ने कहा था कि यदि इसमें कोई संवैधानिकता शामिल है तो आप हाई कोर्ट में चुनौती दे सकते है. NFIW की की याचिका परिसीमन खंड को लेकर थी, जिसमें इसके कार्यान्वयन को स्थगित करने की मांग की गई थी और केंद्र सरकार से पहले जनगणना और परिसीमन अभ्यास करने की आवश्यकता को समाप्त करने का आग्रह किया गया था. संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा ने लगभग आम सहमति से और राज्यसभा ने आम सहमति से पारित किया. इस कानून को लागू करने में थोड़ा समय लगेगा क्योंकि जनगणना कराने सहित परिसीमन का काम अभी पूरा नही हुआ है. नारी शक्ति बंदन अधिनियम विधेयक 2023 में संसद के एक विशेष सत्र में पारित किया गया. यह लोकसभा और दिल्ली सहित सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण देने की बात कही गई है.

-भारत एक्सप्रेस



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