करोड़ो रूपये के शारदा चिटफंड घोटाला मामले में पश्चिम बंगाल कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी राजीव कुमार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है. कोर्ट ने सीबीआई की उस अर्जी को खारिज कर दिया है, जिसमें सीबीआई द्वारा अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग की गई थी. सीजेआई बी आर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने यह आदेश दिया है. कोर्ट आठ सप्ताह बाद इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. पिछली सुनवाई में सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी थी कि लंबित मामलों के साथ सूचीबद्ध कर लिया जाए.
इसपर सीजेआई गवई ने कहा था कि हमें मामले को लंबित क्यों रखना चाहिए? आपने इतने वर्षों में कुछ नही किया. कलकत्ता हाईकोर्ट ने वर्ष 2019 में राजीव कुमार को अग्रिम जमानत दे दिया था जिसके तुरंत बाद सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिया था. राजीव कुमार की ओर से पेश वकील ने दलील दी थी कि सीबीआई ने पिछले 6 सालों में एक भी बार पूछताछ के लिए नही बुलाया है.
CBI टीम को लौटना पड़ा खाली हाथ
जनवरी 2019 में केंद्र सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच उस समय गतिरोध उत्पन्न हो गया था, जब सीबीआई की एक टीम कुमार से पूछताछ करने के लिए उनके आधिकारिक आवास पर पहुच गई थी, लेकिन स्थानीय पुलिस द्वारा एजेंसी के अधिकारियों को हिरासत में लिए जाने के कारण उन्हें वापस होना पड़ा था. वही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राजीव कुमार के बचाव में धरना प्रदर्शन शुरू किया था.
सुप्रीम कोर्ट ने CBI को सौंपी जांच
शारदा समूह की कंपनियों ने लाखों लोगों को उनके निवेश पर अधिक रिटर्न का वादा करके कथित तौर पर 2500 करोड़ रुपए की ठगी की. वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने अन्य चिटफंड मामलों के साथ इस मामले को सीबीआई को सौंप दिया था. उससे पहले कुमार पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा घोटाले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल का हिस्सा थे.
राजीव कुमार 1989 बैंच के पश्चिम बंगाल कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं. उन्हें वर्ष 2023 के दिसंबर में राज्य पुलिस महानिदेशक की जिम्मेदारी दी गई थी. हालांकि लोकसभा चुनाव की घोषणा के बाद निर्वाचन आयोग ने उन्हें डीजी पद से हटा दिया था, लेकिन चुनाव खत्म होते ही राज्य सरकार ने उन्हें फिर से उसी पद पर बहाल कर दिया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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