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अरावली रोड चौड़ीकरण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 473 पेड़ों की कटाई पर लगाई रोक, DDA से पूछा- ‘1.16 लाख पेड़ों का क्या हुआ?’

सुप्रीम कोर्ट ने डीडीए की अरावली रोड चौड़ीकरण के लिए 473 पेड़ों की कटाई की अनुमति देने की याचिका फिलहाल खारिज कर दी है. कोर्ट ने कहा कि पेड़ों की कटाई या स्थानांतरण के मामले में जल्दबाजी नहीं की जाएगी.

डीडीए द्वारा अरावली रोड़ चौड़ीकरण के लिए 473 पेड़ो की कटाई की अनुमति देने से फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है. सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि हम जल्दबाजी में कुछ भी नही होने देंगे. सीजेआई ने कहा कि जब तक हमें यह सुनिश्चित नहीं हो जाता कि हमारे निर्देशों का पालन किया गया है, हम कुछ नही होने देंगे. कोर्ट 19 जनवरी को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा.

मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई ने डीडीए से पूछा कि 116000 पेड़ों का क्या हुआ? सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह ने कहा कि चारदीवारी का निर्माण हो चुका है और 28 फरवरी तक पूरा हो जाएगा. इसपर सीजेआई ने अनुपालन रिपोर्ट दिखाने को कहा. सीजेआई ने कहा कि आप एक दिन में एक लाख से अधिक पेड़ नहीं लगा सकते, पहले आपको खुदाई करनी होगी. कोर्ट ने कहा कि अब तक मौके पर हुई पूरी कार्रवाई की रिपोर्ट चाहिए. कोर्ट ने कहा कि अस्पताल की आवश्यकता को हमारे पिछले फैसले में मान्यता दी गई है. लेकिन ये लगभग 160000 पेड़ हैं और हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि पेड़ों की काटने की दर शून्य हो और काम पूरा हो जाए.

डीडीए की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मैं निर्देशों का पालन करूंगा. सीजेआई ने कहा कि याद रखें ये 18 वन क्षेत्र एआई से निर्मित वन नही होना चाहिए. कोर्ट ने पेड़ो के स्थानांतरण के मामले में हलफनामा देने को कहा है. डीडीए ने सुप्रीम कोर्ट से 473 पेड़ों की कटाई और 2519 पेड़ों के स्थानांतरण की मांग की है. डीडीए ने रिज के 0.79 हेक्टेयर क्षेत्र में सड़क निर्माण किया जाना है, जबकि CAPFIMS अस्पताल तक पहुच के लिए 2.97 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन की अनुमति मांगी है. डीडीए के अनुसार पहले यह वन डायवर्जन 3.6 हेक्टेयर का था, जिसे घटाकर 2.97 हेक्टेयर कर दिया गया है.

पेड़ों की कटाई के खिलाफ याचिकाकर्ता ने उठाया आवाज

डीडीए द्वारा दायर याचिका में यह भी कहा गया है कि पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के तहत द्वारका के ढुलसिरस क्षेत्र में 3.68 हेक्टेयर गैर वन भूमि क्षतिपूरक वृक्षारोपण के लिए पहचान की गई है. इससे पहले सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए)द्वारा 2015 और 2021 के बीच 60000 से अधिक पेड़ों को काटने की अनुमति दिए जाने पर सवाल उठाया था. उनका कहना था कि पेड़ों की कटाई की अनुमति देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं है और पेड़ों के संरक्षण के लिए कोई तंत्र नहीं है. याचिकाकर्ता का यह भी आरोप था कि पेड़ों की कटाई के लिए फर्जी अनुमति जारी की गई है, विशेष रूप से आवासीय परियोजनाओं के लिए.

वही वन अधिकारी ने अपने हलफनामे में कहा था कि पिछले साल 13 दिसंबर 2023 को उन्होंने वसंत कुंज पुलिस थाने के थाना प्रभारी को पत्र लिखा था, जिसमें इस मामले पर संज्ञान लेने और कानून के संबंधित प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज करने को कहा गया था. दायर हलफनामे में यह भी कहा गया था कि प्राथमिकी के तहत जांच कर रहे वसंत कुंज थाने के सहायक उपनिरीक्षक ने वन अधिकारी को जवाबी पत्र में लिखा कि कथित फर्जी अनुमति अपठनीय है.

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-भारत एक्सप्रेस



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