राज्यसभा सांसद जयराम रमेश की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है. जस्टिस सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने जयराम रमेश की ओर से दायर याचिका पर नाराजगी जाहिर करते हुए उन्हें फटकार भी लगाई है. कोर्ट ने जयराम रमेश से कहा कि भारी कीमत चुकाने के लिए तैयार रहें. कोर्ट ने कहा कि हम इसके पीछे के साजिश को जानते है.
सीजेआई ने वकील से कहा कि वे भारी जुर्माने के लिए तैयार रहें और आगे जोड़ा, सिर्फ मीडिया के लिए याचिका दायर करना, अगर आप फैसले से परेशान हैं तो आपको अपना कानूनी रास्ता पता है, आप रिट याचिका के जरिए किसी फैसले की समीक्षा की मांग कैसे कर सकते हैं?उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि इस तरह की याचिकाएं कई बार सिर्फ मीडिया में चर्चा पाने के लिए दायर की जाती हैं. जिसके बाद जयराम रमेश ने दायर याचिका को कोर्ट से वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे कोर्ट ने दे दिया.
जयराम रमेश ने पूर्वव्यापी पर्यावरण मंजूरी दिए जाने के खिलाफ रिट याचिका दायर की थी.
अनुच्छेद 32 के तहत सुनवाई पर उठा सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता से सवाल पूछा कि यह याचिका किस लिए दायर की गई है? कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि आप भलीभांति जानते हैं कि इस मामले में तीन जजों की बेंच ने अपना फैसला दिया है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता से यह भी पूछा कि कोर्ट के फैसले के खिलाफ अनुच्छेद 32 के तहत रिट कैसे सुनवाई योग्य है.
इसपर वकील ने जवाब दिया कि याचिकाकर्ता जनवरी 2026 में जारी ओएम को भी चुनौती दे रहा है. बेंच ने पूछा कि जनवरी 2026 का ओएम क्यों जारी किया गया, तो वकील ने कहा कि यह वनशक्ति में रिव्यू जजमेंट को लागू करने के लिए था.
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-भारत एक्सप्रेस
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