सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है जिसमें मुखर्जी नगर स्थित सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट को गिराने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था. जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने यह फैसला दिया है. दायर याचिका में 17 सितंबर को दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से दिल्ली विकाश प्राधिकरण द्वारा सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट गिराने का रास्ता साफ हो गया है.
अपार्टमेंट गिराने को लेकर कोर्ट का संदेश
दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि फ्लैट तोड़ने पर कोई रोक नहीं है. हालांकि कोर्ट ने फ्लैट मालिकों को फ्लैट खाली करने के लिए 12 अक्टूबर तक का समय दे रखा है. अपार्टमेंट के ज्यादातर फ्लैटों को संरचनात्मक रूप से असुरक्षित घोषित किया गया है. दूसरी ओर फ्लैट मालिकों ने किराए का भुगतान न होने का डीडीए पर आरोप लगाया है. डीडीए के 2007 और 2010 के बीच बनाए गए 336 फ्लैटों को आईटीआई दिल्ली के स्ट्रक्चरल ऑडिट के बाद असुरक्षित पाया गया था.
इसके बाद 2023 में एमसीडी ने इन्हें गिराने के आदेश जारी किए. हालांकि कई निवासियों ने इस आदेश को चुनौती दी है जिसपर हाई कोर्ट सुनवाई कर रहा है. डीडीए ने अपार्टमेंट के निवासियों से 31 जुलाई तक फ्लैट खाली कर उसे सौपनें को कहा था. वही मार्च में जारी की गई एसओपी की तरह 1 मई को जारी की गई नई एसओपी में कही नहीं कहा गया है कि एजेंसी अपार्टमेंट में रहने वाले सभी निवासियों को कब किराया देगी.
सुरक्षा खतरे के कारण नोटिस जारी
डीडीए ने 2000 के दशक के मध्य में सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट का निर्माण कराया था, लेकिन कुछ समय बाद ही इसके निर्माण में गंभीर संरचनात्मक खामियां पाई गई जिसके बाद डीडीए ने अपार्टमेंट में रहने वाले 336 फ्लैट मालिकों को नोटिस जारी किया था. जारी नोटिस में कहा गया था कि यह इमारत खतरनाक श्रेणी में चिन्हित की गई है.
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– भारत एक्सप्रेस
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