Supreme Court: देशभर के स्कूलों में छात्राओं के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और इस्तेमाल योग्य शौचालय उपलब्ध कराने की मांग याचिका पर जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच करेगी सुनवाई. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने कहा कि इस तरह की मांग को लेकर दायर याचिका पर जस्टिस पारदीवाला की बेंच पहले से सुनवाई कर रही है. लिहाजा वही बेंच दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करेगी. यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील रीपक कंसल की ओर से दायर की गई है.
छात्राओं के गरिमा, स्वास्थ्य, और समान शिक्षा के अधिकार प्रभावित होते
दायर याचिका में कहा गया है कि स्कूलों में शौचालय की सुविधा महज बुनियादी ढांचे का मुद्दा नहीं, बल्कि छात्राओं की गरिमा, स्वास्थ्य, निजता, सुरक्षा और शिक्षा के अधिकार से जुड़ा मामला है. याचिकाकर्ता के मुताबिक नीति आयोग की 2026 की रिपोर्ट में देशभर के 98,592 स्कूलों में छात्राओं के लिए कार्यशील शौचालय नहीं होने और 61540 स्कूलों में कोई उपयोग योग्य शौचालय नहीं होने की बात सामने आई है. दायर याचिका में कहा गया है कि शौचालयों की अनुपलब्धता या उनके रखरखाव का सबसे ज्यादा असर किशोरियों पर पड़ता है. इससे मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता प्रबंधन प्रभावित होता है, स्कूलों में अनुपस्थिति बढ़ सकती है और छात्राओं के गरिमा, स्वास्थ्य, निजता और समान शिक्षा के अधिकार प्रभावित होते है.
सुप्रीम कोर्ट के 2012 के फैसले का भी हवाला दिया
दायर याचिका में 2009 के शिक्षा के अधिकार कानून और सुप्रीम कोर्ट के 2012 के फैसले का भी हवाला दिया गया है. इसमें कहा गया है कि लड़के और लड़कियों के लिए अलग तथा कार्यशील शौचालय शिक्षा के अधिकार को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए जरूरी है. याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से देशभर के सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों में छात्राओं के लिए सुरक्षित, स्वच्छ, सुलभ और लगातार कार्यशील अलग शौचालय सुनिश्चित करने के लिए समयबद्ध निर्देश जारी करने की मांग की है. इसके साथ ही स्कूलों में पानी की निर्बाध व्यवस्था, रोजाना सफाई, नियमित रखरखाव, पर्याप्त रोशनी और वेंटिलेशन, सुरक्षित लॉकिंग व्यवस्था, मासिक धर्म स्वच्छता सुविधाएं और दिव्यांग बच्चों के लिए बाधारहित व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है.
अलग से शौचालय और सेनेटरी पैड को लेकरबड़ा फैसला सुनाया
इससे पहले दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 6 से लेकर कक्षा 12 तक के लड़कियों के लिए सरकारी और गैर सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों को लड़कियों के लिए अलग से शौचालय और सेनेटरी पैड को लेकरबड़ा फैसला सुनाया चुका है. अदालत ने हर जेंडर के लिए अलग शौचालय और पानी की सुविधा मुहैया कराने का आदेश दिया था. कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि सभी स्कूलों में छात्राओं को मुफ्त में सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया था. कोर्ट के आदेश को तीन महीने के भीतर सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को लागू कर रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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