Bharat Express DD Free Dish
Pension Mission Shakti Digital
Pension Mission Shakti Digital

अभिभावकों की सहमति के बिना बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से मांगा जवाब

18 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और सभी राज्यों से जवाब मांगा है.

Supreme Court

18 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार सहित देश के सभी राज्यों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने यह नोटिस जारी किया है. कोर्ट 24 सितंबर को मामले में अगली सुनवाई करेगा.

यह याचिका जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन्स अलायंस की ओर से दायर की गई है. दायर याचिका में सोशल मीडिया के इस्तेमाल करने के लिए सुरक्षा उपायों की मांग की गई है. जिसमें माता-पिता या लीगल गार्जियन की सहमति जरूरी होनी चाहिए. दायर याचिका में कहा गया है कि मेटा और दूसरी सोशल मीडिया कंपनियों ने बच्चों के अकाउंट बनाने की आयुसीमा 13 साल तय की है, जो अमेरिकी कानून के मुताबिक है.

बाल यौन शोषण सामग्री की रिपोर्टिंग को लेकर प्लेटफॉर्म्स पर सवाल

जनहित याचिका में यह भी कहा गया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और नाबालिग के बीच कोई समझौता या अनुबंध माता-पिता या कानूनी अभिभावक की सहमति के बिना न हो. इसके लिए अभिभावक की पहचान की पुष्टि और इलेक्ट्रॉनिक पहचान सत्यापन जैसे व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है. याचिकाकर्ता का यह भी आरोप है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री की रिपोर्टिंग को लेकर अपने कानूनी दायित्वों का पूरी तरह से पालन नही किया जा रहा है.

दायर याचिका में इसको लेकर हवाला दिया गया है कि जिनमें कथित तौर पर सोशल मीडिया पर CSEAM को बढ़ावा देने वाले पेड विज्ञापन भी देखने को मिल रहा है. दायर याचिका में इसको लेकर एसओपी बनाने की मांग की गई है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 23 सितंबर 2024 के अपने फैसले में पहले ही सोशल मीडिया इंटेरमेडियरी की जवाबदेही को तय किया था.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि पॉक्सो एक्ट की धारा 19 और धारा 20 तथा पॉक्सो अधिनियम 2020 के तहत ऐसे मामलों की रिपोर्ट संबंधित भारतीय पुलिस ऑथोरिटी को करना जरूरी है.केवल नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रेन (NCMEC) की रिपोर्ट करना पर्याप्त नहीं है.

यह भी पढ़ें:‘काला हिरण: द बैटल फॉर लिगेसी’ पर कानूनी शिकंजा, जानिए किस बात पर अटकी फिल्म की रिलीज

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Pension Mission Shakti Digital