MP News: मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश में ओबीसी वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण देने की मांग को लेकर दायर याचिका सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है. कोर्ट चार जुलाई को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. जस्टिस के वी विश्वनाथन और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया है कि मध्य प्रदेश सरकार को याचिका की कॉपी मुहैया कराने का निर्देश दिया है.
दायर याचिका में कहा गया है कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा एमबीबीएस छात्रों को पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल प्रवेश परीक्षा के लिए दिए गए स्टे का हवाला देकर राज्य सरकार ओबीसी के बढ़े हुए कोटा का फायदा देने से इनकार कर रही है. यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील वरुण ठाकुर के माध्यम से दायर की गई है.
हाई कोर्ट के स्टे का हवाला देकर आरक्षण पर रोक
याचिका में मांग की गई है कि मध्य प्रदेश विधानसभा द्वारा पारित और राष्ट्रपति की अनुमति के बाद अधिसूचित कानून को लागू करने की मांग की गई है. ओबीसी कोटा के तहत पिछड़े वर्गों के लिए 27 फीसदी आरक्षण देना है. मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग ( अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण) अधिनियम 1994 की धारा 4 (2) के तहत सरकारी नौकरियों में ओबीसी के लिए 27 फीसदी आरक्षण का प्रावधान हैं. याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के एक फैसले को आधार बनाकर 27 फीसदी आरक्षण को लागू करने से इनकार कर दिया है. ब
ता दें कि इसको लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार से पहले भी कई सवाल किया है. मध्य प्रदेश कांग्रेस का आरोप है कि वे जानबूझकर 2019 में कांग्रेस सरकार द्वारा पारित कानून को लागू नहीं कर रही है. ज्ञात हो कि इससे पहले भी ओबीसी आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. जिसका कोर्ट ने निपटारा कर दिया है.
हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
याचिका में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पिछले दिनों ओबीसी आरक्षण के खिलाफ लगी याचिका को तर्कहीन मानते हुए खारिज कर दिया था. हाई कोर्ट ने 2021 में दायर हुई इसी जनहित याचिका पर 2023 में महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश के जरिए 87:13 का फार्मूला अभिनिर्धारित किया था.
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया था 2011 कि जनगणना के अनुसार मध्य प्रदेश में ओबीसी की आबादी 50.9 फीसदी है, जबकि अनुसूचित जनजाति की 21.14 फीसदी और मुस्लिम समुदाय की 3.7 फीसदी जनसंख्या है. इसके बावजूद राज्य सरकार ने ओबीसी वर्ग को केवल 14 फीसदी आरक्षण प्रदान किया गया है. जबकि एससी को 16 फीसदी और एसटी को 20 फीसदी आरक्षण दिया गया है.
मध्य प्रदेश में तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने साल 2018 में ओबीसी आरक्षण को 14 फीसदी से बढ़ाकर 27 फीसदी कर दिया था. लेकिन कमलनाथ सरकार के इस आदेश को चुनौती देने के लिए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई थी. इसके साथ ही ओबीसी आरक्षण 27 फीसदी करने के समर्थन में भी याचिकाएं दायर की गई थी.
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-भारत एक्सप्रेस
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