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शंभू बॉर्डर किसान आंदोलन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गठित समिति से सीलबंद लिफाफे में मांगी रिपोर्ट

शंभू बॉर्डर किसान आंदोलन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गठित उच्चस्तरीय समिति से सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट मांगी है. कोर्ट ने संकेत दिया है कि राजमार्ग खुलने के बाद अब मामले को समाप्त करने का समय आ गया है.

Shambhu Border Farmers Protest
Edited by Vaibhav Gupta

सुप्रीम कोर्ट किसानों द्वारा शंभू बॉर्डर पर हुए किसान आंदोलन से संबंधित मामला आने वाले समय में खत्म कर सकता है. कोर्ट ने इस मामले में गठित उच्चस्तरीय समिति से सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट तलब किया है. साथ ही कोर्ट ने अगले आदेश तक इसकी सामग्री पर रोक लगा दिया है, जिसके बाद सिफारिशों को विचार के लिए संबंधित सरकारों को भेजा जा सकता है.

कार्यवाही को खत्म करने का समय: कोर्ट

सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि जमीनी स्थिति में काफी सुधार हुआ है. राजमार्गों पर लगी नाकाबंदी खत्म हो गई है, तथा वाहनों का आवागमन बिना किसी बाधा के फिर से शुरू हो गया है. कोर्ट ने संकेत दिया है कि समिति की सिफारिशों वाली संक्षिप्त रिपोर्ट मिलने के बाद कार्यवाही को खत्म करने का समय आ गया है.

क्या था मामला?

फरवरी 2024 में हरियाणा सरकार ने अंबाला-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर बैरिकेडिंग किया था, जब संयुक्त किसान मोर्चा और किसान मजदूर मोर्चा ने अपनी मांगों के समर्थन में दिल्ली मार्च की घोषणा की थी और किसान 13 फरवरी 2024 से वहां डटे हुए थे.

बता दें कि 2 सितंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस नवाब सिंह की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय एक हाई पावर कमेटी का गठन किया था. इस कमेटी को किसानों से एमएसपी और अन्य मुद्दों पर बातचीत करने का निर्देश दिया था और पैनल से किसानों से बैरिकेडिंग हटाने के लिए बात चीत करने बको कहा गया था.

कोर्ट ने किसानों से क्या कहा था?

कोर्ट ने किसानों से यह भी कहा था कि वे अपने आंदोलन का राजनीतिकरण न करें और अपनी बैठकों में अनुचित मांगे न रखे. ज्ञात हो कि केंद्र पर उनकी मांगों को पूरा करने के लिए कदम ना उठाने का आरोप लगाया है और दावा किया है कि 18 फरवरी 2024 के बाद से केंद्र सरकार ने उनके मुद्दों पर उनसे कोई बातचीत नहीं की है.

MSP के लिए कानून गारंटी के अलावा, किसान स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश को लागू करने, किसानों और खेत मजदूरों के लिए पेंशन, कृषि ऋण माफी, भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 को बहाल करने और 2020-21 में पिछले आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग कर रहे है.

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-भारत एक्सप्रेस



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