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कैश फॉर क्वैरी मामले में लोकपाल की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने महुआ मोइत्रा को नोटिस जारी कर मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने कैश फॉर क्वैरी मामले में महुआ मोइत्रा को नोटिस जारी किया है और दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है जिसमें लोकपाल के लिए 60 दिन की समय-सीमा तय की गई थी.

Mahua Moitra Cash for Query Scam
Edited by Vaibhav Gupta

सुप्रीम कोर्ट ने कैश फॉर क्वैरी मामले में लोकपाल की ओर से दायर याचिका पर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा, सीबीआई और बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. साथ ही कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दिया है.

हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ SC में याचिका

दरअसल, सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में जवाब देने को कहा है. लोकपाल ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस निर्देश पर भी रोक लगा दिया है, जिसमें लोकपाल से कहा गया था कि वह 60 दिन के भीतर तय करे कि महुआ मोइत्रा के खिलाफ सीबीआई को चार्जशीट दाखिल करने की अनुमति दी जाए या नहीं.

महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया है कि निगरानी संस्था ने गलत तरीके से सीबीआई को उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल करने की अनुमति दे दी, जिसमें उन पर संसद में प्रश्न पूछने के बदले में व्यवसायी दर्शन हीरानंदानी से नकदी और उपहार स्वीकर करने का आरोप है.

12 नवंबर को लोकपाल की पूर्ण पीठ ने लोकपाल अधिनियम की धारा 20(7)(A) उपधारा धारा 23 (1) के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए सीबीआई को चार सप्ताह में महुआ मोइत्रा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने की अनुमति दी थी और कहा था कि चार्जशीट के एक कॉपी उसके सामने भी पेश की जाए.

प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन

हाई कोर्ट में महुआ मोइत्रा की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि लोकपाल का आदेश लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के खिलाफ है और वह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन करता है, क्योंकि यह उनके विस्तृत लिखित और मौखिक प्रस्तुतियों पर विचार किए बिना पारित किया गया है.

इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने लोकपाल और सीबीआई को निर्देश दिया था कि वे तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ कथित रूप से धन के बदले संसद में प्रश्न पूछने के मामले में चल रही लोकपाल कार्यवाही की गोपनीयता बनाए रखना सुनिश्चित करें.

लोकपाल को सौंपी गई CBI रिपोर्ट

अदालत ने मोइत्रा की याचिका का निपटारा करते हुए कहा था कि लोकपाल व सीबीआई को 5 जून को जारी परिपत्र के निर्देशों के साथ वैधानिक प्रावधानों के अनुसार गोपनीयता बनाए रखना अनिवार्य है. लोकपाल को सौंपी गई सीबीआई की रिपोर्ट मीडिया में लीक हो गई थी.

वहीं, इस मामले में आचार समिति ने मोइत्रा को दोषी ठहराया था और बाद में उन्हें 8 दिसंबर, 2023 को लोकसभा सांसद के पद से निष्कासित कर दिया गया था. उन पर व्यवसायी और मित्र दर्शन हीरानंदानी की ओर से प्रश्न पूछने के बदले नकद प्राप्त करने का आरोप लगाया गया था.

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-भारत एक्सप्रेस



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