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सिर्फ कुत्तों लिए ही क्यों है प्यार? सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- बच्चों की मौत का जिम्मेदार कौन?

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि अब केवल प्रशासन ही नहीं, बल्कि कुत्तों को खाना खिलाने वाले लोग और संगठन भी जवाबदेह होंगे. कोर्ट ने दोटूक कहा कि अगर किसी बच्चे या बुजुर्ग की मौत होती है, तो भारी मुआवजा वसूलने का आदेश दिया जाएगा.

Supreme Court stray dog hearing
Edited by Vaibhav Gupta

सुप्रीम कोर्ट आवारा कुत्तों के मामले में दायर याचिकाओं पर 20 जनवरी को सुनवाई जारी रखेगा. जस्टिस विक्रमनाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच दायर याचिकाओं पर सुनवाई करेगा.

भारी मुआवजे का आदेश

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि अब कुत्तों के हमलों के लिए न केवल जिम्मेदार अधिकारियों बल्कि उन्हें खाना खिलाने वालों की जवाबदेही भी तय की जाएगी. कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि बच्चों या बुजुर्गों के घायल होने या मौत होने की स्थिति में राज्य सरकारों के खिलाफ भारी मुआवजे का आदेश दिया जाएगा.

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कुत्तों को खिलाने वाले ग्रुप से पूछा कि क्या आपकी भावनाएं सिर्फ कुत्तों के लिए है, इंसानों के लिए नहीं? कोर्ट ने पूछा कि क्या अदालत को आंखे मूंद लेनी चाहिए? सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि इन मौतों के लिए जिम्मेदार कौन हैं? कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जब आवारा कुत्तों द्वारा एक 9 साल के बच्चे को मार दिया जाता है. जिन्हें कुत्ता प्रेमी संगठन द्वारा पाला-पोसा जा रहा है, तो किसे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए? कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि सहानुभूति सिर्फ कुत्तों के लिए ही है.

अपने घर या परिसर में ही रखें- कोर्ट

कोर्ट ने ये भी कहा कि अगर आप उन्हें खाना खिला रहे हैं, तो उन्हें अपने घर रखें. उन्हें खुले में घूमकर लोगों को काटने और उन पर हमला करने की इजाजत क्यों दी जाए? कुत्ते के काटने का असर जीवनभर रहता है. कोर्ट ने कहा कि कुत्ते प्रेमियों और उनका प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों पर भी जवाबदेही डाली जाएगी, नहीं तो कुत्तों को अपने घर या परिसर में ही रखें.

एआई से ट्रैकिंग करने जैसे कई सुझाव

कोर्ट ने आगे कहा कि आवारा कुत्तों को इधर-उधर घूमने और उपद्रव मचाने की अनुमति क्यों दी जानी चाहिए. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के एक वकील ने आवारा कुत्तों को गोद लेने, एआई से उनकी ट्रैकिंग करने जैसे कई सुझाव दिया है. इसपर जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि आप सच में ऐसा कह रहे है? काश कोई अनाथ बच्चों के लिए भी इस तरह का तर्क दे पाता.

जस्टिस मेहता ने कहा कि मुझे 2011 में जज नियुक्त किया गया था, लेकिन मैंने इंसानों के लिए इतने भावुक तर्क नहीं सुने है. जस्टिस मेहता ने कहा कि अगर आप पालतू जानवर लेना चाहते हैं तो लाइसेंस लें.

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-भारत एक्सप्रेस



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