आवारा कुत्तों के मामले में दायर विभिन्न याचिकाओं पर 28 जनवरी को भी सुनवाई जारी रहेगी. जस्टिस विक्रमनाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ मामले में सुनवाई कर रही है.मामले की सुनवाई के दौरान भारती त्यागी के वकील ने कहा कि मैंने इस मुद्दे से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय न्यायक्षेत्रो द्वारा अपनाए जा रहे उपायों पर एक नोट दिया है. जिसमें नीदरलैंड का जिक्र किया गया है. जानवरों को छोड़ने से रोकने के लिए नीदरलैंड मॉडल अपनाने की सलाह दी गई है. वकील हर्ष जैदका ने कहा कि मेरी चिंता अलग हैं. मेरे इलाके में बहुत सारे आवारा कुत्ते है. जिसके चलते इलाके में पूरी तरह से अशांति है.
उन्होंने कहा कि नींद की समस्या होने लगी है और बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे है. उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नही की है. उन्होंने कहा कि हम केवल टीकाकरण और नसबंदी कर सकते हैं. राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने भी कोई कार्रवाई नहीं कि है. उपद्रव होने पर आवारा कुत्तों को हटाया जा सकता है.
कोर्ट ने किया विचार करने का सुझाव
वही सुनवाई के दौरान वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि प्रभावी नसबंदी कुछ शहरों में कारगर साबित हुआ है. दुर्भाग्य से यह प्रणाली अधिकांश शहरों में कारगर नहीं रही है. नसबंदी से समय के साथ आवारा कुत्तों की संख्या कम हो जाती है. साथ ही उनकी आक्रमकता भी कम हो जाती है. भूषण ने कहा कि एक ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जहां लोग बिना नसबंदी वाले आवारा कुत्तों की रिपोर्ट कर सके. भूषण ने कहा कि कुत्तों का अल्ट्रासाउंड भी किया जा सकता है. इसपर जस्टिस मेहता ने कहा कि हम कुत्ते को प्रमाण पत्र ले जाने के लिए क्यों नही कर सकते? भूषण ने कहा कि इस विषय पर बहुत साहित्य उपलब्ध है. यह विशेषज्ञों का मामला है, कृपया विशेषज्ञ समिति की नियुक्ति पर विचार करें.
उन्होंने कहा कि कुत्तों का भी अल्ट्रासाउंड किया जा सकता है. भूषण ने कहा कि कभी-कभी कोर्ट की टिप्पणियों का गंभीर परिणाम भुगतने पड़े है. वही मेनका गांधी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन ने कहा कि मेरी मुवक्किल कई वर्षों तक केंद्रीय मंत्रिमंडल में मंत्री रह चुकी है. जस्टिस विक्रमनाथ ने कहा कि कुछ देर पहले आप कह रहे थे कि अदालत को सतर्क रहना चाहिए. क्या आपने पता लगाया कि वह किस तरह के बयान दे रही हैं.
रामचंद्रन ने कहा कि बिल्कुल अगर मैं अजमल कसाब के लिए पेश हो सकता हूं, तो उनके लिए भी पेश हो सकता हूं.
बजट आवंटन और योगदान पर कोर्ट ने मांगा स्पष्टीकरण
इसपर जस्टिस विक्रमनाथ ने कहा कि आपकी मुवक्किल ने अवमानना की है. हमने कोई कार्रवाई नही की है., यही हमारी उदाहरण है. आप देखिए वह क्या कहती हैं, उनकी बॉडी लैंग्वेज. रामचंद्रन ने कहा कि सार्वजनिक टिप्पणियों के मामले में वकीलों और जजों का दृष्टिकोण अलग-अलग होता है. जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि चूंकि आपकी मुवक्किल मंत्री रह चुकी हैं और पशु अधिकार कार्यकर्ता है. तो हमें बताइए कि आपके आवेदन में बजट आवंटन का जिक्र क्यों नही है. इन क्षेत्रों में आपके मुवक्किल का क्या योगदान रहा है? इसपर रामचंद्रन ने कहा कि इसका उत्तर मौखिक उत्तर से नहीं हो सकता.
कुत्तों के काटने के शिकार होने वालों की ओर से पेश वकील शुभम गुप्ता ने कहा कि बार-बार काटने वाले आवारा कुत्तों की जिम्मेदारी कोई नहीं ले रहा है. अगर कुत्ते आक्रामक और हिंसक है, तो उन्हें मारना अनिवार्य है.
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-भारत एक्सप्रेस
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