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असम SIR मामले में दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई का दिया भरोसा

असम में मतदाता सूची के शुद्धिकरण और ‘घुसपैठियों’ के नाम हटाने को लेकर संग्राम अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. क्या असम में भी बिहार की तर्ज पर घर-घर सत्यापन (SIR) होगा? याचिकाकर्ताओं का दावा है कि अगर जल्द सुनवाई नहीं हुई तो पूरी प्रक्रिया बेकार हो जाएगी.

Assam SIR Case
Edited by Vaibhav Gupta

Assam SIR Case: दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई का भरोसा दिया है. सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष मेंशन कर जल्द सुनवाई की मांग की गई.

सुनवाई न होने पर SIR हो जाएगी निष्फल

दरअसल, मामले को लेकर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा है कि हम देखेंगे कि क्या किया जा सकता है. हालांकि याचिकाकर्ता के वकील ने कल सुनवाई की मांग की थी. उन्होंने कहा है कि इस मामले पर कल ही सुनवाई कर ली जाए, नहीं तो एसआईआर की प्रक्रिया निष्फल हो जाएगी.

बता दें कि दाखिल याचिका में मतदाता सूची के शुद्धिकरण के नाम पर राज्यों के बीच भेदभाव करने का आरोप लगाया है. अन्य याचिका में सुप्रीम कोर्ट से असम में भी बिहार जैसा एसआईआर कराने की मांग की है.

दशकों से विवादों में असम की मतदाता सूची

गुवाहाटी हाई कोर्ट के बार एसोसिएशन के पूर्व प्रेसिडेंट अध्यक्ष मृणाल कुमार चौधरी की ओर से दाखिल याचिका में निर्वाचन आयोग द्वारा 17 नवंबर को असम को मनमाना, भेदभावपूर्ण और अनुचित बताते हुए रद्द करने की मांग की है. असम की मतदाता सूची बीते कई दशकों से विवादों के घेरे में रही है. राज्य में नागरिकता पर विवाद भी काफी पुराना है. तमाम राजनीतिक संगठन इसमें.बड़े पैमाने पर बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम होने के आरोप लगाते रहे हैं.

पूरी कवायद विवादों में घिरी

80 के दशक में घुसपैठ के मुद्दे पर करीब छह साल तक व्यापक आंदोलन झेल चुके इस सीमावर्ती राज्य में घुसपैठियों को बाहर निकालने के लिए ही नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस की कवायद शुरू हुई थी. लेकिन बरसों चली इस कवायद पर करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद जब सूची तैयार हुई तो 19 लाख से ज्यादा नाम इससे बाहर हो गए थे. इसके बाद यह पूरी कवायद विवादों में घिर गई.

क्या है विपक्षी दल का तर्क?

एसआईआर जिसका पहला मकसद घर-घर सत्यापन के जरिए अपात्र मतदाताओं को हटाना है, को अन्य राज्यों में लागू किया जा रहा है. विपक्षी दल तर्क देते हैं कि असम में, जहां पहले से ही एनआरसी के कारण नागरिकता का मुद्दा अत्यंत संवेदनशील है और अंतिम एनआरसी सूची को राज्य सरकार ने स्वीकार नहीं किया है, वहां एसआईआर को लागू करने से मतदाता सूची की सटीकता सुनिश्चित होती और अपात्र नामों को हटाने का एक व्यापक प्रयास हो पाता.

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-भारत एक्सप्रेस



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