Bharat Express DD Free Dish
Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital
Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital

ट्रांसजेंडर पहचान कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती; केंद्र सरकार को नोटिस जारी, खुद की पहचान तय करने के अधिकार पर टिकी निगाहें

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों) संशोधन अधिनियम, 2026 की धारा 2(k) के प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार सहित अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से बुजुर्गों की सुविधाओं पर स्टेटस रिपोर्ट मांगी.

सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों) संशोधन अधिनियम 2026 की धारा 2 (k) के प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. यह कानून में अपनी पहचान खुद तय करने वाले लोगो को ट्रांसजेंडर व्यक्ति की परिभाषा से बाहर रखता है.

सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. साथ ही कोर्ट ने मुख्य याचिका के साथ इसे संलग्न कर दिया है. याचिकाकर्ता कलकत्ता हाईकोर्ट में प्रैक्टिश करने वाले ट्रांसजेंडर वकील है. इन्होंने संशोधित धारा 2(k) के उस प्रावधान को चुनौती दी है, जिसमें कहा गया है, बशर्ते कि इसमें अलग-अलग यौन रुझान और अपनी पहचान खुद तय करने वाले यौन पहचान वाले लोग शामिल नहीं होंगे, और न ही कभी शामिल किए गए थे. नए संशोधित बिल के मुताबिक ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को अब अपनी पहचान खुद तय करने का अधिकार नही होगा, ट्रांसजेंडर पहचान के लिए मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट आवश्यक होगी.

डीएम सर्टिफिकेट से पहले मेडिकल बोर्ड की मंजूरी होगी जरूरी

ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के खिलाफ अपराधों के लिए सख्त सजा हो सकती है. ऐसे में खुद को ट्रांसजेंडर मानने वाले लाखों लोग इस कैटेगरी से बाहर हो जाएंगे. 2019 के एक्ट में यह प्रावधान था कि कोई भी शख्स अपनी इच्छा से खुद को ट्रांसजेंडर घोषित कर सकता था और उसके बाद उसे डीएम से सर्टिफिकेट मिल जाता है. लेकिन अब यह व्यवस्था समाप्त हो गई है और मेडिकल टेस्ट कराना जरूरी कर दिया गया है. मेडिकल टेस्ट के बाद ही डीएम किसी को ट्रांसजेंडर का सर्टिफिकेट दे पाएंगे.

सुप्रीम कोर्ट ने नालसा बनाम भारत संघ 2014 के केस में यह फैसला सुनाया था कि खुद की पहचान मौलिक अधिकार है. कोई भी व्यक्ति यह तय कर सकता है कि वह पुरुष है, महिला है या फिर ट्रांसजेंडर है. इसके लिए किसी मेडिकल जांच की जरूरत नही है.

साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय कानून सेवा प्राधिकरण से जुड़े फैसले में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों को मान्यता दी थी.

ये भी पढे़ं- जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की निगरानी पर हाई कोर्ट सख्त, नई याचिका दायर करने की सलाह

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital