सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में सुपरटेक लिमिटेड की लंबित 16 परियोजनाओं को पूरा करने को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. जिसके बाद 51 हजार घर खरीदारों को घर मिलने की उम्मीद अब जग गई है. कोर्ट ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल के आदेश को बरकरार रखा है. जिसमें इन परियोजनाओं को सरकारी स्वामित्व वाली नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन यानी एनबीसीसी को सौपनें की अनुमति दी थी.
सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह आदेश दिया है. 2010-2012 के बेच जिन लोगों ने फ्लैट बुक किया है, उनको सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का फायदा मिलेगा. कोर्ट ने एनबीसीसी को तीन साल में प्रोजेक्ट पूरा करने को कहा है. सुपरटेक ने अभी तक काम पूरा नही किया है. सुपरटेक पर आरोप है कि कंपनी ने पैसा कहीं और ट्रांसफर कर दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने NBCC को अधूरे प्रोजेक्ट सौंपा
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कर दिया है कि देश के कोई भी अदालत या फोरम सुप्रीम कोर्ट के आदेश में दखन नहीं देगा. कोर्ट ने कहा सुपरटेक कंपनी इन परियोजनाओं को.समय पर पूरा करने में असफल रही है. घर खरीदारों के हितों की रक्षा और समयबद्ध निर्माण सुनिश्चित करने के लिए एनबीसीसी को परियोजनाओं का प्रबंधन और निर्माण सौंपा जाना उचित है. साल 2021-22 में कंपनी को दिवालिया प्रक्रिया में डाल दिया गया. जिसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुचा था. सुप्रीम कोर्ट ने.स्पष्ट किया कि खरीदारों की रजिस्ट्री को प्राथमिकता दी जाएगी. परियोजना से प्राप्त होने वाली राशि का उपयोग पहले निर्माण कार्यों को पूरा करने में होगा, इसके बाद बैंकों का कर्ज चुकाया जाएगा.
इन सभी के बाद यदि कोई राशि शेष रहती है तो प्राधिकरण के बकाया चुकाया जाएगा. कोर्ट ने यह भी कहा कि प्राधिकरण के बकाया रजिस्ट्री में किसी तरह की बाधा नहीं बनेगा. सुपरनोवा एक मिक्स्ड यूज डेवलपमेंट है, जिसमें रेसिडेंशियल फ्लैट्स, ऑफिस स्पेस, रिटेल और लग्जरी होटल शामिल है. यह प्रोजेक्ट करीब 70 हजार वर्ग मीटर जमीन पर बन रहा है और इसका अनुमानित लागत 2300 करोड़ रुपए से अधिक है.
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-भारत एक्सप्रेस
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