राजस्थान की जोजरी नदी में औद्योगिक अपशिष्ट छोड़े जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा लिए गए स्वतः संज्ञान पर कोर्ट 9 अक्टूबर को फैसला सुनाएगा. राजस्थान सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि कोर्ट के हर आदेश का पालन किया जाएगा.
उन्होंने कोर्ट को बताया कि राजस्थान सरकार इससे निपटने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है. जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने राजस्थान सरकार से हकफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है.
यह एक गंभीर चिंता का विषय- SC
राजस्थान सरकार के वकील ने कोर्ट को यह भी बताया कि इसको लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने वर्ष 2022 में विस्तृत आदेश दिया था, जिसके खिलाफ सिविल अपील कोर्ट में लंबित है. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह गंभीर चिंता का विषय है और सरकार को इस प्रदूषण पर रोक लगाने तथा जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाना होगा. कोर्ट ने 9 अक्टूबर को अतिरिक्त महाधिवक्ता को कोर्ट में मौजूद रहने को कहा है. इसपर कोर्ट ने कहा हम फैसला सुनाएंगे.
नदी का पानी खेतों को कर रहा बंजर
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने जोजरी नदी में फैक्ट्रियों के केमिकल युक्त जहरीले पानी गिरने पर चिंता जताई है. नदी में बहता यह काला और बदबूदार पानी खेतों को बंजर कर रहा है, गॉवों के तालाब व कुए प्रदूषित कर रहा है और लोगों के स्वास्थ्य पर सीधा खतरा पैदा कर रहा है. कोर्ट ने आगे कहा था कि नदी में फैक्ट्रियों से निकलने वाला प्रदूषित पानी और कचरा डाला जा रहा है. इससे अनगिनत गांव प्रभावित हैं. इन गांवों में पीने योग्य पानी भी नहीं बचा है. कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि पानी प्रदूषित जैसे गंभीर मुद्दे पर किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नही की जाएगी.
सीजेआई के पास भेजा जाए मामला- कोर्ट
कोर्ट ने कहा था कि मामले को सीजेआई के पास भेजा जाए, ताकि आगे उचित आदेश दिया जा सके. जोजरी नदी में औद्योगिक अपशिष्ट छोड़े जाने से स्वास्थ्य एवं अन्य परिस्थितिकी तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. जोजरी नदी के विषैले पानी से प्रभावित गांवों में जोधपुर और बालोतरा जिले के कुछ गांव आते हैं. इनमें धवा, मेलावा, लोनावास, कल्याणपुर, आरबा और डोली समेत करीब एक दर्जन गांव है.
जोजरी नदी राजस्थान की एक प्रमुख मौसमी नदी है. यह नागौर जिले के पंडालू गांव की पहाड़ियों से निकलती है और जोधपुर जिले के खेजलड़ा खुर्द गांव के पास लूणी नही में मिलती है. लूणी-जोजरी का संगम क्षेत्र सदियों जीवनदायिनी माना जाता था. यह रास्ते में ही धवा गांव के पास रेगिस्तान में लुप्त हो जाती है. बता दें कि लोकसभा चुनाव से पहले केंद्रीय जलशक्ति मंत्री रहते हुए गजेंद्र सिंह शेखावत ने नदी की पुनरुद्धार योजना का 15 मार्च 2024 को शिलान्यास किया था.
तब दावा किया था कि यहां लगने वाले सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और पानी निकासी की व्यवस्था से नही का पानी इतना निर्मल हो जाएगा कि लोग इसके किनारे बैठकर चाय पी सकेंगे और किसान टमाटर की खेती कर सकेंगे.
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-भारत एक्सप्रेस
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