सुप्रीम कोर्ट दिल्ली के महरौली में संजय वन स्थित दो प्राचीन स्मारक आशिक अल्लाह दरगाह और बाबा फरीद की चिल्लागाह को संरक्षित करने की मांग वाली याचिका पर 28 अप्रैल को सुनवाई करेगा. सीजेआई संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने एएसआई से एक साइट बनाने के लिए कहा है, ताकि आगे से अतिक्रमण न हो. सीजेआई ने कहा कि मौजूदा स्थल पर कोई निर्माण या कोई संरचना नहीं होगी. सीजेआई ने कहा कि मूल संरचना जिस रूप में अस्तित्व में थी, उसका पता लगाना और सत्यापित करना आवश्यक है. कोर्ट ने एएसआई को आगे की स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है.
कोर्ट ने यह भी कहा कि लोग पैसा कमाने के लिए अतिक्रमण करते हैं और लगाते है. कोर्ट ने मौजूदा स्थल पर कोई संरचना या निर्माण पर अंतरिम रोक लगा दिया है. एएसआई ने इस मामले में अंतरिम रिपोर्ट दाखिल की है. एएसआई की रिपोर्ट के मुताबिक यह 700 साल पहले बना एक ऐतिहासिक स्मारक है.
बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट ने महरौली में 13वीं शताब्दी की आशिक अल्लाह दरगाह और बाबा फरीद की चिल्लागाह आदि संरचनाओं की सुरक्षा के लिए निर्देश देने से इनकार कर दिया था. जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है. प्राचीन स्मारक आशिक अल्लाह दरगाह और बाबा फरीद की चिल्लागाह स्मारक 12 वीं और 13 वीं शताब्दी के एतिहासिक ढांचे है. यह बात भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने सुप्रीम कोर्ट में सौंपी अपनी रिपोर्ट में कहीं है.
एएसआई का कहना है कि इन दोनों ही पुरातात्विक ढांचों का धार्मिक महत्व है. हर दिन मुश्लिम श्रद्धालु आशिक अल्लाह दरगाह और 13 वीं शताब्दी के बाबा शेख फरीदुद्दीन के चिल्लागाह पर आते है. शेख शिहाबुद्दीन का मकबरा और बाबा शेख फरीदुद्दीन शकरगंज का चिल्लागाह वर्तमान में मूल विरासत के ढांचे में बड़े पैमाने पर परिवर्तन के साथ एक आधुनिक रूप है.
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-भारत एक्सप्रेस
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