दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि कानून का उल्लंघन करने वाले कथित बच्चे एवं वयस्क अपराधी के मुकदमे की कार्यवाही संयुक्त रूप से नहीं चलाया जा सकता है, भले ही किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) ने बच्चे को मनोवैज्ञानिक और शारीरिक रूप से परिपक्व घोषित किया हो. जस्टिस अनीश दयाल ने कहा कि जेजे अधिनियम की धारा 23 के अनुसार बच्चे व वयस्क का मुकदमा एक साथ नहीं चलना चाहिए. क्योंकि उक्त धारा उसे प्रतिबंधित करता है.
अदालत ने कहा कि जब एक बार निष्कर्ष निकल जाता है कि अपराधी बच्चा है या वयस्क, तो जेजे अधिनियम की धारा 23(2) लागू हो जाएगी. वयस्क के मुकदमे को अलग करना होगा, भले ही उन पर एक ही तररह का आरोप लगाया गया हो. अगर इसकी अनुमति दी जाती है तो धारा 23 के तहत निषेध को निर्थक बना देगा, जिसकी अनुमति नहीं दी जा सकती. उन्होंने यह बात एक बच्चे की पुनरीक्षण याचिका पर विचार करते हुए कही.
बच्चे ने वयस्क के साथ उसका मुकदमा न चलाने की मांग को खारिज करने वाले सत्र अदालत के आदेश को चुनौती दी थी. वयस्क अभियुक्त और बच्चा दोनों ही स्कूली छात्र थे. उन पर एक शिक्षक को चाकू से घायल करने का आरोप था. शिक्षक को अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया था. पुनरीक्षण याचिका को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने कहा कि बच्चे का मुकदमा वयस्क आरोपी से अलग चलेगा.
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.



