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“यह हमारा काम नहीं”: कृषि आय पर टैक्स की मांग वाली याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त

Delhi High Court: क्या खेती की कमाई पर लगेगा टैक्स? दिल्ली हाई कोर्ट ने साफ किया अपना रुख. जानें क्यों अदालत ने कृषि आय पर टैक्स लगाने की मांग वाली याचिका को सुनने से किया इनकार और क्या हैं वर्तमान नियम.

Delhi high court
Edited by Shubhra Rai

Income Tax Rules: दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली में कृषि आय (Agricultural Income) पर टैक्स लगाने के निर्देश देने की मांग वाली एक जनहित याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने स्पष्ट किया कि टैक्स संबंधी नियम बनाना अदालत का नहीं, बल्कि विधायिका का काम है.

आकाश गोयल द्वारा दायर इस याचिका में तर्क दिया गया था कि कृषि आय पर मिलने वाली निरंतर छूट से आर्थिक असमानता बढ़ रही है और अमीर लोग इसका गलत फायदा उठा रहे हैं. हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट ने इसे ‘नीतिगत मामला’ बताते हुए हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया.

वर्तमान नियमों के अनुसार, फसल की बिक्री से होने वाला मुनाफा पूरी तरह टैक्स फ्री है, बशर्ते वह शुद्ध रूप से कृषि आय की श्रेणी में आता हो.

जनहित याचिका खारिज

दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली में कृषि आय पर टैक्स लगाने के निर्देश देने की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि यह नीतिगत मामला है. यह विधायिका के अधिकार क्षेत्र में आता है, लिहाजा अदालत दायर जनहित याचिका पर कोई आदेश पारित नहीं कर सकता है.

लगातार छूट को चुनौती

यह याचिका आकाश गोयल नामक शख्स की ओर से दायर की गई थी. दायर याचिका में कृषि आय टैक्स में दी जा रही लगातार छूट को चुनौती दी गई थी. याचिका में कहा गया था कि लगातार दी जा रही छूट से असमानता पैदा होता है, और अधिक आमदनी वाले लोग इसका गलत फायदा उठाते है.

एक पैसा टैक्स नहीं देना

बता दें कि खेती से होने वाली आय पूरी तरह से टैक्स फ्री होती हैं. मतलब फसल बेचकर कितना भी मुनाफा हो उसपर एक पैसा टैक्स नहीं देना पड़ता है. लेकिन खेती की जमीन बेचने पर कुछ मामलों में आय टैक्स देना पड़ सकता है यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर है कि जमीन ग्रामीण है या शहरी.

दरअसल सरकार द्वारा किसान को बिचौलियों और दलालों के शोषण से बचाने के लिए फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित/ घोषित किया जाता है, लेकिन कुल मिलाकर खाद्यान्न तथा खाद्य पदार्थों का बाजार भाव भी उद्योगपति तथा व्यापारी ही तय करते हैं.

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-भारत एक्सप्रेस 



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