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‘प्राइवेट पार्ट छूना और पजामे के नाड़े को तोड़ना रेप नहीं …’ हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार, जानें क्या बोले जज?

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले पर संज्ञान लिया, जिसमें नाबालिग से रेप और रेप की कोशिश को अपराध न मानने की बात कही गई थी. जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने इसे असंवेदनशील बताते हुए केंद्र और यूपी सरकार से चार हफ्ते में जवाब मांगा है.

नाबालिग से रेप और रेप की कोशिश न मानने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा लिए गए स्वतः संज्ञान पर जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने चिंता जाहिर की है. कोर्ट ने केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार सहित अन्य को नोटिस जारी किया. कोर्ट ने चार सप्ताह में जवाब मांगा है. कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल से कोर्ट को सहायता करने को कहा है. इसके अलावे कोर्ट ने विवादित हिस्सों पर रोक लगा दिया है.

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा द्वारा दिए गए फैसले पर नाराजगी जाहिर की है. कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट का यह फैसला असंवेदनशीलता को दर्शाता है. कोर्ट ने कहा कि यह फैसला जल्दबाजी में नही दिया गया है बल्कि फैसला सुरक्षित रखने के चार महीने बाद दिया गया है. इस फैसले में कई गई टिप्पणी अमानवीय रुख को दर्शाता है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था कि अभियोजन पक्ष के जो आरोप हैं, उसमें कहा गया है कि लड़की का प्राइवेट पार्ट पकड़ा गया और उसके पायजामें का नाड़ा तोड़ा गया, हाई कोर्ट ने कहा कि ये आरोप अपने आप में रेप और रेप की कोशिश का केस नहीं बनता है.

हाईकोर्ट ने कहा – ‘नाड़ा खोलना’ रेप की कोशिश नहीं

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बेला त्रिवेदी की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया था. अंजली पटेल की ओर से दायर याचिका में इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वो फैसले के विवादित हिस्से को हटाकर दुरुस्त करें. इसके साथ ही याचिका में जजों की ओर से की जाने वाली ऐसी विवादित टिप्पणियों को रोकने के लिए दिशा निर्देश जारी करने की मांग की गई थी. हाई कोर्ट ने कहा है कि स्तन पकड़ने और पायजामे का नाड़ा खोलना दुष्कर्म नहीं है, बल्कि यौन उत्पीड़न है.

यह मामला कासगंज के पटियाली थाना क्षेत्र का है. चार साल पहले पीड़िता की मां ने 12 जनवरी 2022 को ट्रायल कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई थी. आरोप लगाया कि 10 नवंबर 2021 को वह अपनी 14 साल की बेटी के साथ पटियाली में देवरानी के घर गई थी. उसी दिन शाम को लौटते वक्त गांव के ही पवन, आकाश और अशोक मिल गए. पवन ने बेटी को अपनी बाइक पर बैठाकर घर छोड़ने की बात कही. मां ने उसपर भरोसा करते हुए बाइक पर बैठा दिया. रास्ते में पवन और आकाश ने लड़की को पकड़ लिया और उसके कपडे उतारने का प्रयास करते हुए पुलिया के नीचे खींचने लगे.

हाईकोर्ट ने बदल दी आरोपों की कानूनी धारा

बता दें कि इससे पहले आरोपियों के खिलाफ धारा 376 आईपीसी (बलात्कार) और पॉक्सो एक्ट की धारा 18 (अपराध करने का प्रयास) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था. हाई कोर्ट ने कहा कि आरोपियों पर लगाए गए आरोप और मामले के तथ्यों के आधार पर इस मामले में रेप की कोशिश का अपराध नहीं बनता. इसकी बजाय उन्हें आईपीसी की धारा 354 (बी) यानी पीड़िता को निवस्त्र करने या उसे नग्न होने के लिए मजबूर करने के इरादे से हमला या दुर्व्यवहार करने और पॉक्सो एक्ट की धारा 9 (एम) के तहत आरोप के तहत तलब किया जा सकता है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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