सुप्रीम कोर्ट फिल्म उदयपुर फाइल्स पर लगी रोक को हटाने की मांग वाली याचिका पर 25 जुलाई को भी सुनवाई जारी रहेगी. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच रोक फिल्म के रिलीज पर लगी रोक को हटाने की मांग को लेकर दायर दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है. कोर्ट ने कहा कि प्रभावित पक्षकार केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए 6 कट के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सकते है.
फिल्म देखना या न देखना दर्शकों का अधिकार
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि फिल्म के खिलाफ यह हमारी आपत्तियों का हिस्सा है. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि कोई भी उपन्यास लिख सकता है, कहानी लिख सकता है, फिल्म बना सकता है. अगर हर वो चीज दिखाई जाए, जिससे किसी की पहचान हो या जिससे कोई जुड़ा हो, तो इससे बहुत भ्रम पैदा होगा. फिल्म देखना या न देखना समाज का अधिकार है. लोगों को उनकी पसंद की फिल्म देखने की अनुमति देकर भी आपके अधिकार की रक्षा की जा सकती हैं.
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि फिल्में वास्तविक जीवन पर भी बनती है. जिसपर कोर्ट ने फिल्म पर लगी रोक हटाने के संकेत दिए. कोर्ट ने कहा कि समाज के दो पहलू होते हैं. जब किसी को हम बरी करते हैं तब भी समाज होता है.
रियल घटनाओं पर फिल्म बनाना गलत नहीं: कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समाज में जो भी अच्छा बुरा होता है वह सबकुछ फिल्मों में आता है. कोई कहता है कि मैं यह फिल्म अमुक वजह से नहीं देखना चाहता यह उसकी मर्जी है. रियल इंसिडेंट पर तमाम फिल्में आती है. वही याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि फिल्म कहती है कि यह एक व्यक्ति की हत्या पर आधारित है.
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हमारी न्यायपालिका को कम मत समझो. कभी-कभी लोग अनावश्यक रूप से आशंकित हो जाते हैं. अगर हमें ब्लैकमेल किया जाता है तो हम एक दिन भी अदालत को नहीं दे पाएंगे, केवल इसलिए कि कुछ लोगों को रिश्वत दी गई है, यह न्यायिक प्रशिक्षण का हिस्सा है.
भारत एक्सप्रेस
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