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उमर खालिद ने अभियोजन पक्ष पर लगाए गंभीर आरोप, कहा चार्जशीट में बढ़ा चढ़ाकर किया पेश

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र और दिल्ली दंगों के कथित आरोपी उमर खालिद ने दिल्ली पुलिस की साजिश की सीक्रेट मीटिंग्स को खारिज कर दिया.

Umar Khalid

उमर खालिद.

Edited by Vaibhav Gupta

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र और दिल्ली दंगों के कथित आरोपी उमर खालिद ने दिल्ली पुलिस की साजिश की सीक्रेट मीटिंग्स को खारिज कर दिया. कड़कड़डूमा कोर्ट ने चल रही सुनवाई के दौरान उमर खालिद ने कहा कि ये मीटिंग्स कोई छिपी साजिश नही था, बल्कि सीएए बिल के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध की खुली चर्चाएं थी.

उमर खालिद के वकील ने आरोप तय करने को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान यह बातें कही है. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर वाजपेयी की कोर्ट मामले में सुनवाई कर रही है.

पांच सालों से जेल में बंद

मामले की सुनवाई के दौरान उमर खालिद के वकील ने कहा कि वह पांच साल से अधिक समय से जेल में बंद है. उसके पास से कोई हथियार बरामद नहीं हुआ है, उन्होंने कहा कि बिना सबूत के कोई अपराध नहीं बनता है. उन्होंने कहा कि अभियोजन पक्ष की ओर से दायर चार्जशीट में खालिद को केवल इस आधार पर आरोपी बनाया गया है, कि वह एक व्हाट्सएप ग्रुप में मौजूद था, लेकिन कोई संदेश भेजा ही नहीं, उन्होंने कहा कि सिर्फ ग्रुप का सदस्य होना अपराध कैसे हो सकता है.

पुलिस बयानों पर आधारित है केस

पिछली सुनवाई के दौरान खालिद की ओर से पेश वकील त्रिदीप पेस ने कहा था कि दिल्ली पुलिस ने ठोस सबूत पेश करने के बजाए उनकी गिरफ्तारी के लगभग एक साल बाद दर्ज किए गए गवाहों के बयानों पर भरोसा किया है. उन्होंने कहा था कि यह केस पूरी तरह से पुलिस बयानों पर आधारित है. इसमें ना तो कोई ठोस और ना ही कोई फिजिकल सबूत मौजूद हैं. खालिद के वकील ने कहा कि आप घटना के 11 महीने बाद किसी को भी पकड़ सकते हैं, उससे कुछ भी कहलवा सकते है. यह मामला 2020 का है.

ग्रुप में किए केवल तीन मैसेज

वहीं अभियोजन पक्ष का कहना था कि सबूतों की उसे जरूरत नहीं है. सिर्फ बयानों की जरूरत है. भाषण के अलावा यह बिना किसी भौतिक साक्ष्य का मामला है. खालिद के वकील ने स्पष्ट किया था कि चार व्हाट्सएप ग्रुपों में खालिद को जोड़ा गया, उनमें से उसने सिर्फ डीपीएसजी ग्रुप में तीन मैसेज भेजे थे. उन्होंने कहा कि हालांकि उसे एमएसजे ग्रुप में जोड़ा गया. लेकिन उसने कोई मैसेज नहीं भेजा और ना ही कोई संदेश उसे संबोधित किया गया.

यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों से जुड़ा है, जिसमें 53 लोगों की मौत हुई और 700 से अधिक घायल हुए थे. दंगों में मारे गए लोगों में 38 मुस्लिम और 15 हिंदू थे.

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-भारत एक्सप्रेस



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