बिहार में आपराधिक मुकदमें में ट्रायल लंबा समय तक चलने पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने नाराजगी व्यक्त की है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो देश भर की अदालतों को इस मसले पर सीधे निर्देश जारी करेंगे.
हर साल बनती है पैन इंडिया गाइडलाइंस
कोर्ट ने कहा कि पैन इंडिया गाइडलाइंस हर साल बनाई जाती है. जस्टिस अरविंद कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि ट्रायल में देरी नहीं कि जा सकती हैं, जैसे ही चार्जशीट दाखिल होता है, आरोप तय होना चाहिए.
अदालत ने कहा कि यह क्या है, मुकदमें के दस्तावेज तैयार होने में ही तीन से चार साल लग जाते हैं. ये क्या है. हम जानते है कि कार्यप्रणाली क्या हैं. बिहार के एक आपराधिक मामले में आरोपी अमन कुमार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल में देरी को लेकर नाराजगी जतायी हैं.
मसौदा तैयार करने में 3-4 साल
अदालत ने आगे कहा कि यह क्या है? हम देखते हैं कि मुद्दों का मसौदा तैयार करने में तीन से चार साल लग जाते हैं? ये क्या है? मैं गुजरात में अपना अनुभव साझा कर रहा था. हम जानते हैं और कार्यप्रणाली क्या है. हम यहां साझा नहीं करना चाहते हैं. लेकिन मुकदमें में देरी नहीं की जा सकती है. उन्होंने कहा कि जैसे ही आरोपपत्र दाखिल होता है, आरोप तय होने चाहिए. कुछ लोगों को बरी किया जा सकता है यह ठीक है. इस संबंध में पूरे देश में दिशा निर्देश जारी करना होगा.
सहायता क लिए एमिकस क्यूरी नियुक्त
कोर्ट ने इस मामले में कोर्ट की सहायता करने के लिए वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है. साथ ही कोर्ट ने कागजात अटॉर्नी जनरल को भेजने की अनुमति दी है, क्योंकि हम देश भर की सभी अदालतों को आवश्यकता पड़ने पर निर्देश देने का प्रस्ताव रखते है. मामले की सुनवाई के दौरान पेश वकील ने कहा कि महाराष्ट्र में, यही मामला हाई कोर्ट में लंबित है. जस्टिस अरविंद कुमार ने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो हम सीधे निर्देश जारी करेंगे.
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-भारत एक्सप्रेस
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