कुलदीप सिंह सेंगर
दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत के मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. अदालत ने पीड़िता की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें दोषी पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा को बढ़ाने की मांग की गई थी. कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यह याचिका दायर करने में 1945 दिनों की बहुत लंबी देरी हुई है. पीड़िता इस देरी की कोई ठोस वजह बताने में भी असफल रही, जिसके कारण कोर्ट ने इसे स्वीकार करने से मना कर दिया.
क्या था पूरा मामला?
यह मामला साल 2017 का है, जब कुलदीप सिंह सेंगर पर एक नाबालिग लड़की के अपहरण और बलात्कार का दोष साबित हुआ था. इसी केस के दौरान पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी. 13 मार्च 2020 को निचली अदालत (तीस हजारी कोर्ट) ने सेंगर को इस मामले में 10 साल की कठोर सजा और 10 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी. पीड़िता चाहती थी कि इस सजा को और बढ़ाया जाए, लेकिन अब हाई कोर्ट ने उनकी अपील पर विचार करने से इनकार कर दिया है.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने निर्देश दिया था कि दिल्ली हाई कोर्ट को सेंगर की अपील और पीड़िता की याचिका पर तीन महीने के भीतर फैसला लेना चाहिए. चूंकि सेंगर अपनी सजा का काफी हिस्सा जेल में काट चुका है, इसलिए उसकी जमानत की मांग पर भी हाई कोर्ट को जल्द निर्णय लेना है. इससे पहले 18 जनवरी को हाई कोर्ट ने सेंगर को जमानत देने से मना कर दिया था, जिसे उसने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

